फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अप्रिय शब्दों को भी मधुर ढंग से कहना तो कोई अटलजी से सीखे, पढ़ें ये रोचक वाक्या

Thu, 16 Aug 2018 01:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 5
अटल जी - फोटो : डेमो
अप्रिय शब्दों को भी मधुर ढंग से कहना अटल विहारी वाजपेयी की अनूठी शैली रही। वह सामने वाले को गलती का अहसास ऐसे कराते थे कि उसे बुरा भी न लगे। प्रदेश में भाजपा व बसपा गठबंधन की सरकार थी। मुख्यमंत्री थीं मायावती। 
विज्ञापन

2 of 5
- फोटो : डेमो
किसी प्रसंग को लेकर बसपा के कुछ नेताओं की महात्मा गांधी पर टिप्पणी को लेकर विवाद छिड़ा हुआ था। भाजपा, बसपा के साथ थी सो स्वाभाविक रूप से विपक्ष केनिशाने पर भाजपा भी थी। बसपा के नेता आंबेडकर के देश के प्रति योगदान की तुलना गांधी जी से करते घूम रहे थे। 
विज्ञापन

3 of 5
अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : डेमो
भाजपाइयों को जवाब देना मुश्किल हो रहा था। सचिवालय में गांधी जयंती पर कार्यक्रम था। विधानसभा के मौजूदा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित बताते हैं, अटल जी और मायावती दोनों कार्यक्रम में पहुंचे। हम सभी लोगों की जिज्ञासा थी कि अटल जी आखिर क्या बोलेंगे? वाजपेयी जी बोलने खड़े हुए चरिपरिचित अंदाज। 

4 of 5
अटल बिहारी वाजपेयी
कहा, महात्मा गांधी और डॉ आंबेडकर सहित अन्य कई महापुरुषों ने भारत के वर्तमान स्वरूप को गढ़ा है। दोनों लोग स्वर्ग में हैं। क्या हम चाहते हैं कि वे भी यहां लड़ाई शुरू करें? 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : डेमो
स्वर्ग में अशांति न फैलाओ मेर भाई! वे परस्पर प्रेमी हैं। प्रेम से रहने दो। सभी राष्ट्र भक्त हैं। हम सबको समग्रता में ही सोचना चाहिए। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें