तेरे माथे पे ये आंचल बहुत खूब है लेकिन, तू इस आंचल को एक परचम बना लेती तो अच्छा था। लखनऊ का जानाना पार्क जंगे आजादी का एक ऐसा मूक गवाह है जिसके साये में परदानशीं महिलाओं ने अपने आंचल को परचम बनाया और जंगे आजादी का बिगुल फूंककर गांधी जी के सपने को साकार किया। महात्मा गांधी ने लखनऊ में एक ऐसे पार्क की इच्छा जताई थी कि जहां पर पर्दानशीं औरतें घर की चहारदीवारी से निकलकर आजाद फिजा में सांस लें और अपनी खूबियों को तराशें।