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बापू की इच्छा पर बना था देश का पहला 'लेडीज पार्क', नेहरू से लेकर इंदिरा तक आ चुकीं हैं यहां

Wed, 03 Oct 2018 01:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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महिलाओं का पार्क - फोटो : अमर उजाला
तेरे माथे पे ये आंचल बहुत खूब है लेकिन, तू इस आंचल को एक परचम बना लेती तो अच्छा था। लखनऊ का जानाना पार्क जंगे आजादी का एक ऐसा मूक गवाह है जिसके साये में परदानशीं महिलाओं ने अपने आंचल को परचम बनाया और जंगे आजादी का बिगुल फूंककर गांधी जी के सपने को साकार किया। महात्मा गांधी ने लखनऊ में एक ऐसे पार्क की इच्छा जताई थी कि जहां पर पर्दानशीं औरतें घर की चहारदीवारी से निकलकर आजाद फिजा में सांस लें और अपनी खूबियों को तराशें। 
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महिलाओं का पार्क - फोटो : amar ujala
अमीनाबाद स्थित जनाना पार्क में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 25 जुलाई1934 को महिलाओं की विशाल सभा को संबोधित कर मौजूद महिलाओं को जंगे आजादी का अग्रदूत कहा था। बज्म-ए-ख्वातीन की वर्तमान अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत बताती हैं कि गांधी जी की इच्छा पर लखनऊ के रईस सर गंगा प्रसाद वर्मा ने 1914 में अमीनाबाद में 15,000 हजार रुपये में करीब तीन एकड़ जमीन खरीदी जिसे बाद में बज्म-ए-ख्वातीन की संस्थापक बेगम सुल्ताना हयात को दान स्वरूप दे दी।
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महिलाओं का पार्क - फोटो : amar ujala
बज्म-ए-ख्वातीन की ओर से यहां पर जनाना पार्क बनाया गया। वहां पर आठ साल से ऊपर के किसी भी पुरुष को अंदर आने की मनाही थी। इस पार्क की खास बात ये थी कि यहां पर चौकीदार, माली से लेकर तमाम कर्मचारी महिलाएं ही थीं। इस पार्क में होने वाले तमाम कार्यक्रमों में गांधी जी से लेकर प्रदेश की तत्कालीन गवर्नर सरोजनी नायडू, प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, इंदिरा गांधी जैसी हस्तियों ने हिस्सा लिया। 
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महिलाओं का पार्क - फोटो : amar ujala
वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान लखनऊ में पहली बार बुर्कानशीं औरतों ने जनाना पार्क से मोतीमहल लॉन स्थित कांग्रेस मुख्यालय तक मार्च निकाला और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात की।
 
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