लखनऊ के सिविल अस्पताल के मेन ब्लॉक के दूसरे तल पर आइसोलेशन वार्ड में सोमवार तड़के शॉट सर्किट से लगी आग से हड़कंप मच गया। एक के बाद एक पैनल बॉक्स में हुए धमाके से मरीज और तीमारदार नींद से जाग गए। वार्ड में धुंआ भरने से चीख-पुकार मच गई। दहशत में आए मरीज-तीमारदार बाहर की ओर भागे।
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वहीं, गेट के पास लगे पैनल बॉक्स में आग लगी थी। उन्हें किसी तरह समझाकर वहीं रोका गया। मौके पर पहुंचे कर्मचारियों ने मेन स्विच बंद कर दिया और मेंटेनेंस का काम शुरू हो गया। आग सोमवार सुबह पांच बजे लगी। इससे मरीजों और तीमारदारों की जान मुश्किल में आ गई। करीब सात घंटे तक वार्ड में अंधेरा पसरा रहा। (लाइन चेक करते इलेक्ट्रिशियन।)
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हालांकि मेन लाइन में किसी तरह की दिक्कत न होने से सेंट्रलाइज्ड एसी चलता रहा, जिससे मरीजों को पूरी तरह बंद वार्ड में गर्मी और सांस लेने की समस्या से नहीं जूझना पड़ा। अगर आग विकराल रूप ले लेती तो कम से कम 111 मरीजों के साथ 100 तीमारदार और अन्य स्टाफ की जान सांसत में पड़ सकती थी।
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मेन ब्लॉक के दूसरे तल पर कार्डियोलॉजी यूनिट के सामने बने सर्जिकल वार्ड के दूसरे हिस्से में स्थित 22 बेड का आइसोलेशन वार्ड है। जानकारी के मुताबिक सुबह करीब पांच बजे के नर्सिंग ड्यूटी एरिया के बिलकुल पीछे लगे इलेक्ट्रिक बोर्ड पैनल में आग लग गई। घटना के वक्त सभी वार्ड पूरी तरह फुल थे। वार्ड में भर्ती बुखार समेत अन्य रोगों मरीज और उनके तीमारदार भाग खड़े हुए।
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वार्ड में भर गया धुंआ, मची चीखपुकार
वार्ड में धुंआ भर गया और चीख पुकार मच गई। मौके पर पहुंचे सुरक्षा गार्डों और अन्य कर्मचारियों ने जल चुके पैनल को खोलने के बाद दहशत में खड़े मरीजों और तीमारदारों को समझा-बुझाकर स्थिति सामान्य की। इसके बाद मरीज व तीमारदार वार्ड में गए। करीब आठ बजे से वार्ड में जल चुके पैनल के मेन स्विच की रिपेयरिंग का काम शुरू हुआ। पैनल जलने की वजह से सुबह पांच से दोपहर करीब बारह बजे तक वार्ड में अंधेरा पसरा रहा। करीब एक बजे गड़बड़ी ठीक हो सकी।
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दहशत के साथ टूटी नींद
एक मरीज के तीमारदार अभिषेक कुमार ने बताया कि आग लगने के बाद बोर्ड में तीन बार तेज धमाका हुआ और वार्ड की लाइट बंद हो गई। वार्ड में धमाका सुन बेड पर सो रहे मरीजों और तीमारदारों की नींद दहशत के साथ टूटी। पैनल में स्पार्किंग की लपट और तेज आवाज सुन मरीज और तीमारदार भागे तो निकलने का कोई रास्ता नहीं था क्योंकि पैनल निकास द्वार के पास ही लगा था। (अस्पताल में भर्ती एक मरीज।)
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पैनल में रिस कर घुसा टंकी का पानी
अस्पताल में लापरवाही और बदइंतजामी का आलम ये है कि दूसरे तल की छत पर लगी टंकी का पानी फॉल्स सीलिंग से होकर मेन स्विच बॉक्स में आ गया। सूत्रों की मानें तो पानी रिस कर जैसे ही पैनल में पहुंचा उसमें लगी एमसीबी में शॉर्ट सर्किट होने लगा और तेज धमाके के साथ चिंगारी निकलने लगी। ऑटो कट होने की वजह से बिजली गुल हो गई। अगर बिजली अपने आप नहीं कटती तो हालात विकराल हो जाते।
बेकाबू होती आग तो होता होता बड़ा नुकसान
अस्पताल के मेन ब्लॉक के दूसरे तल पर 40 बेड की कार्डियक यूनिट, छह बेड की आईसीयू यूनिट, आठ बेड का प्राइवेट वार्ड, 35 बेड का सर्जरी वार्ड और 22 बेड के आइसोलेशन वार्ड के साथ आधुनिक रसोई घर है। कुल 111 बेड पर भर्ती मरीज, 100 से अधिक तीमारदार और 20 से अधिक डॉक्टर व स्टाफ की जान मुश्किल में पड़नी तय थी। दूसरे तल पर बने रसोई घर में रखे सिलेंडर तक आग पहुंच जाती तो धमाके से पूरा तल और अस्पताल का दूसरा हिस्सा भी तबाह हो जाता और हजारों मरीजों की जान पर आफत टूट पड़ती।