भीषण आग ने कुछ ही मिनटों में तिनका-तिनका जोड़कर बनाए गए आशियाने को राख कर दिया। जब तक फायर बिग्रेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं 49 आशियाने जलकर पूरी तरह राख हो गए।
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कई साल तक मेहनत मजदूरी करके उन्होंने, जो आशियाना तैयार किया उसे जलते हुये पांच मिनट तक नहीं लगे। भीषण लपटों ने चंद मिनटों में ही उनका झोपड़ी ही नहीं बल्कि सपने तक जलाकर राख कर दिए।
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गोमतीनगर विस्तार के मकदूमपुर गांव में रेल पटरी के किनारे बनी झोपड़ियों में मंगलवार की सुबह आग लग गई। भीषण लपटों ने कुछ ही मिनटों में पूरी की पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया।
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आग बुझाने की कोशिश करते हुए विशु और उसकी पत्नी रहीदन मामूली रूप से झुलस गए। बस्ती वालों के पास न तो खाने-पीने का सामान बचा और न ही कपड़े। डीएम राजशेखर व जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. शिव प्रसाद यादव ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
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डीएम के निर्देश के बाद एडीएम पूर्वी, एडीएम ट्रांसगोमती, एडीएम राजस्व, जॉइंट मजिस्ट्रेट, सीएमओ, तहसीलदार समेत जिला प्रशासन की टीम राहत और बचाव कार्य में जुटी रही।
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आग
- फोटो : amar ujala
गोमतीनगर विस्तार क्षेत्र में शहीदपथ के किनारे-किनारे आसाम मूल के सैकड़ों गरीब परिवार झोपड़ी बनाकर रहते हैं। अधिकतर पुरुष कबाड़ और कूड़ा बिनने का काम करते हैं, जबकि महिलाएं आस-पास के फ्लैटों में चौका-बर्तन कर गुजर बसर करती हैं।
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सुबह सभी काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे तभी एक झोपड़ी में आग लग गई। इसके बाद आग की लपटें फैलने लगीं। वहां चीख पुकार मच गई।
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लोगों ने बाल्टियों से पानी फेंकना शुरू कर दिया, लेकिन आग ने 10 मिनट के भीतर ही आस पास की झोपड़ियों को चपेट में ले लिया। लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी। (आग लगने के बाद लगी भीड़।)
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इसके बाद वहां गोमतीनगर, इंदिरानगर, हजरतगंज फायर स्टेशन से दमकल की सात गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। हालांकि गाड़ियां पहुंचने में एक घंटे से भी अधिक का समय लग गया और तब तक पूरी बस्ती जलकर राख हो गई।
दमकलकर्मियों ने लगभग साढ़े आठ बजे आग पर काबू पा लिया। 49 झोपड़ियों में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर खाक हो गया। आग को पूरी तरह बुझाने में करीब तीन घंटे लगे।