कड़ाके की ठंड के बीच फुटपाथ पर जिस बेटी की सिसकियां आपने सुनीं, वह मैं ही हूं। 15 दिन ही हुए हैं मुझे इस दुनिया में आए हुए। अभी तो मैंने सपने देखना भी शुरू नहीं किया था...अंगुलियां भी नहीं पकड़ पा रही थी कि मेरे अपने मुझे फुटपाथ पर फेंक गए... क्यों? मेरी क्या गलती थी? क्या मुझे फेंकते वक्त कलेजा थोड़ा भी नहीं कांपा, दिल जरा भी नहीं पसीजा?
विज्ञापन
2 of 7
फुटपाथ पर मिली मासूम
- फोटो : amar ujala
महानगर की सचिवालय कॉलोनी में मिली बिटिया की सिसकियां उम्र भर इन सवालों के जवाब मांगेंगी, पर उत्तर शायद कोई न दे पाए।
मासूम फुटपाथ पर एक कपड़े में लिपटी पड़ी थी। उसकी सिसकियां जब लोगों के कानों तक पहुंची तो भीड़ जुट गई। कुछ लोगों ने इसे उठाया, दुलारा और चुप कराने की कोशिश की। ममता की गर्माहट मिली तो उसकी सिसकियां कम हो गई।
विज्ञापन
3 of 7
फुटपाथ पर मिली मासूम
- फोटो : amar ujala
पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस पहुंची तो मुझे ठंड से बचाने के लिए अपने जैकेट में लपेट लिया और चाइल्डलाइन को सौंप दिया। मासूम को देख कई लोगों ने पुलिस से उसे गोद लेने की इच्छा जाहिर की।
4 of 7
फुटपाथ पर मिली मासूम
- फोटो : amar ujala
एक और बात मुझे कहनी है...
मैं तो अपनी किस्मत खुद लिखूंगी, पर एक बात कहूंगी ... बेटियों से ऐसे मुंह न मोड़िए। हम सुरक्षित होंगी तो आपका मान ही बढ़ाएंगी?
विज्ञापन
5 of 7
फुटपाथ पर मिली मासूम
- फोटो : amar ujala
महानगर में सचिवालय कॉलोनी के पास रोती मिली दुधमुंही को देख उमायादव नामक बच्ची ने पुलिस को सूचना दी थी। बाल कल्याण समिति की सदस्य सुधारानी ने बताया कि बच्ची को चिकित्सीय परीक्षण व इलाज के लिए झलकारी बाई अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके बाद उसे प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय बालगृह शिशु में आश्रय दिया जाएगा। प्रभारी निरीक्षक शिवशंकर सिंह ने बताया कि उपनिरीक्षक अरविंद कुमार व आरक्षी प्रदीप मिश्रा मौके पर पहुंचे और ठंड से कांप रही बच्ची को अपनी जैकेट में छिपाकर थाने लाए।
विज्ञापन
6 of 7
फुटपाथ पर मिली मासूम
- फोटो : amar ujala
इलाके के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे है। बच्ची को फेंकने वालों का पता लगाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को शक है कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा सूर्यास्त के बाद कृत्य किया गया। बच्ची को किसी वाहन से लाने की आशंका के चलते सीसीटीवी फुटेज से संदिग्ध वाहनों को चिन्हित किया जा रहा है। इसके अलावा इलाके में हाल ही में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। निजी अस्पतालों में भी छानबीन की जाएगी।
11 साल में फेंके गए 152 नवजात में 103 बेटियां
तहजीब के शहर में भी जन्मे बच्चों को सड़क पर फेंकने वाले निर्दयी भी रहते हैं। 11 साल में कपड़े में लपेट कर पुटपाथ पर फेंके गए 152 बच्चों को चाइल्ड लाइन को सौंपा गया। इनमें 103 बेटियां है। इनके अलावा नवजात के शव फेंके जाने की बड़ी संख्या है।