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धान को लगी यूरिया की नजर, फसल चौपट होने के कगार पर, चहुंओर है हाहाकार...

Wed, 26 Aug 2020 12:53 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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भूवनेश्वर प्रसाद - फोटो : amar ujala
केस-1
लाइन में डटे रहे, पर बारी आने से पहले खत्म हो गई खाद
अंबेडकरनगर जिले के महरुआ गांव निवासी नीरज सिंह के धान की फसल में यूरिया खाद नहीं पड़ पाई। इसके लिए वह सोमवार सवेरे 10 बजे सहकारी समिति पहुंचे और लाइन में लगे, लेकिन डेढ़ बजे खाद खत्म हो गई। पर, उनकी बारी ही नहीं आई। इसके बावजूद वह इस उम्मीद में वहीं और डेढ़ घंटे तक खड़े रहे कि प्रशासन खाद का प्रबंध करेगा। पर, उन्हें निराश ही लौटना पड़ा। अब दोबारा खाद कब मिल पाएगी, यह बताने वाला कोई नहीं है। 
केस-2
फसल की चिंता ने खत्म कर दी भूख-प्यास
देहात (बलरामपुर) के किसान भूनेश्वर प्रसाद बताते हैं कि यूरिया पाने के लिए हर दिन सवेरे 5 से 6 बजे तक सहकारी समिति पहुंच जाते हैं। हजारों किसानों के बीच वहां दो-तीन दिन में एक बार 400 बोरी यूरिया आती है, जो कुछ ही किसानों को मिल पाती है। जबकि बाकी किसान मायूस होकर घर लौट जाते हैं। अगर एक-दो दिन में यूरिया नहीं मिली तो फसल बर्बाद हो जाएगी, इस चिंता ने भूख-प्यास खत्म कर दी है। सोचता हूं कि आगे परिवार को क्या खिलाऊंगा।
केस-3
15 कोस का सफर तय कर मिली एक बोरी यूरिया
बाराबंकी जिले के खारिका फूल गांव निवासी अंतर्वेदी को सिद्धौर, सेमरावा, ककरहा, देवीगंज, असंदरा में कई चक्कर लगाने के बाद यूरिया नहीं मिली तो 15 कोस दूर बदोसरायं जाना पड़ा। वहां बड़ी मुश्किल से सिर्फ एक बोरी यूरिया मिली। सिद्धौर के रमाशंकर व सत्य प्रकाश बताते हैं सुबह से शाम तक घर के सभी लोग पूरे क्षेत्र में यूरिया की तलाश करते थे। जिन दुकानदारों के पास थी, वह डेढ़ सौ रुपये महंगी दे रहे थे। ऐसे में समिति पर कई दिन लाइन लगाने के बाद यूरिया मिल पाई।
केस-4
44 किमी के सफर के बाद भी मिली नाउम्मीदी

लखनऊ के मोहनलालगंज में गौरा साधन सहकारी समिति पर मौजूद किसान रामकुमार ने बताया कि समितियों पर मिलने वाला 270 रुपये का यूरिया खाद बाजार में 800 रुपये में मिल रहा है। अब खाद के लिए करीब 44 किमी तक का चक्कर लगाकर यहां पहुंचा हूं। पहले देवती साधन सहकारी समिति गया, वहां से करोरा और अब गौरा आया हूं, लेकिन यहां हंगामा देखकर नाउम्मीदी ही हाथ लगी। गरीब किसान यह बढ़ी हुई कीमत देने में सक्षम नहीं है। उसे डर सता रहा है कि उसकी फसल बर्बाद न हो जाए।
 
खेतों में लहलहाती धान की फसल को अच्छी पैदावार के लिए यूरिया की जरूरत है। कहीं एक-दो दिन में तो कहीं इससे कुछ अधिक दिन में यूरिया नहीं डाली गई तो सब खत्म हो जाएगा। इस चिंता ने किसानों की भूख-प्यास खत्म कर दी है। पर, प्रशासनिक दावे चौंकाने वाले हैं कि प्रदेश में कहीं यूरिया की किल्लत नहीं है।
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यूरिया पाने के लिए जुटी किसानों की भीड़ को संभालते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
हर दिन सुबह से शाम तक किसान सहकारी समितियों पर यूरिया के लिए लाइन में लगते हैं, लेकिन गिनती के चंद किसानों को ही खाद मिल पाती है। क्योंकि हजारों किसानों के बीच दो-तीन दिन में महज 400 बोरी खाद आता है। नतीजतन बाकी किसान मायूस होकर घर लौट जाते हैं। एक दिन, दो दिन या यूं कहें कई दिनों से चल रहा यह क्रम अब किसानों के माथे पर बल डालने लगा है।
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अंबरलाल जायसवाल - फोटो : amar ujala
वहीं, यूरिया के लिए सहकारी समितियों पर लाइन में लगने में ही पूरा दिन निकल जाता है। इससे किसान दूसरी फसलों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। इस संबंध में ‘अमर उजाला’ ने अवध क्षेत्र के किसानों के दर्द को साझा करने का प्रयास किया है। बहराइच जिले में बलहा के भज्जापुरवा निवासी अंबरलाल जायसवाल बताते हैं कि कई दिन से सहकारी केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन यूरिया नहीं मिल रही है। निजी दुकानों पर इसकी किल्लत है। इससे धान की फसल चौपट हो रही है।

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विक्रमा सिंह - फोटो : amar ujala
इसी में कंजीबाग निवासी विक्रमा सिंह जोड़ते हैं कि किसानों की पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।
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करिगन - फोटो : amar ujala
बलरामपुर के किसान करिंगन कहते हैं कि ब्लैक में 500 से 600 रुपये खाद मिल रहा है। इस दर पर गरीब किसानों के लिएखाद खरीद पाना संभव नहीं है। जबकि बलरामपुर के जिला कृषि अधिकारी मंजीत कुमार का कहना है कि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को यूरिया पहुंचाई भी जा रही है। भीड़ अधिक होने के कारण कुछ किसानों को परेशानी जरूर होती है, लेकिन सभी किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं, बहराइच के मिहींपुरवा स्थित किसान सेवा सहकारी समिति के सचिव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि 2,400 बोरी यूरिया की मांग सात दिन पूर्व उच्चाधिकारियों को भेजी गई थी, लेकिन अभी तक खाद समिति पर नहीं पहुंची है। इस पर जिला कृषि अधिकारी सतीश कुमार पांडेय कहते हैं कि कार्रवाई कराई जा रही है। 



 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
राजधानी के किसानों को भी यूरिया नसीब नहीं 
लखनऊ जिले के बक्शी का तालाब और इटौंजा क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों से एक सप्ताह से यूरिया नहीं है। मोहनलालगंज में छह में से दो समितियों पर ही खाद मिल रही है। निगोहां में बाजार में रेट कम कराने को किसान मिन्नतें कर रहे हैं। यहां एक माह में चार में दो समितियों में ही खाद आई है। उधर, मलिहाबाद क्षेत्र की आधा दर्जन साधन सहकारी समितियों पर खाद नहीं है। 
 
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