डॉ अमित गुप्ता, विभागाध्यक्ष नेफ्रोलॉजी पीजीआई
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घर पर भी की जा सकती है ये डायलिसिस
डायलिसिस वाले मरीजों को पेरिटोनियल डायलिसिस (पीडी) से राहत मिल सकती है। खास बात है यह डायलिसिस घर पर की जा सकती है। इससे करीब 15 साल तक मरीज जिंदा रह सकते हैं। एसजीपीजीआई में अब तक 250 मरीजों पर यह प्रयोग किया गया है। सालभर में पीडी पर खर्च करीब दो हजार रुपये ही आता है। जबकि इतना खर्च तो हॉस्पिटल में कराए जाने वाले एक बार के हीमो डायलिसिस पर आ जाता है। कई मरीजों को तो हर हफ्ते हीमो डायलिसिस करानी पड़ती है।
पेरिटोनियल डायलिसिस है क्या
डॉ. अिमत गुप्ता ने बताया, किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करा पाने वाले घर बैठे एक सहयोगी की मदद से डायलिसिस कर सकते हैं। इसमें मरीज के पेट में करीब 10 सेमी. की कैथेटर ट्यूब लगा दी जाती है। इससे पेरिटोनियल डायलिसिस फ्लूइड (पीडीएफ) जोड़ दिया जाता है। इससे शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ एवं यूरिया पानी के साथ फिल्टर होकर निकलता रहता है। करीब छह माह में कैथेटर को बदल दिया जाता है।
बीपीएल मरीजों को मुफ्त इलाज
डॉ. गुप्ता ने कहा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से यह बीपीएल मरीजों को मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इसमें पेरिटोनियल डायलिसिस को शामिल कर लिया जाए तो गंभीर मरीजों को राहत मिलेगी।