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बजट से बाजार को उम्मीदें: नोटबंदी-जीएसटी का असर घटा, नहीं चाहते नया टैक्स

Tue, 30 Jan 2018 09:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ के बाजारों में पिछले कुछ महीनों से पहले नोटबंदी और फिर जीएसटी का जो असर था वह अब छंटने लगा है। कारोबारियों को उम्मीद है कि आने वाले अपने आम बजट में वित्त मंत्री कुछ ऐसी जादू की छड़ी घुमाएंगे कि चीजों में बहुत सुधार आएगा। हालांकि जीएसटी लगने के बाद अलग-अलग सेक्टरों में कारोबारियों की अपनी अपेक्षाएं हैं। व्यापारी कोई ऐसा टैक्स नहीं चाहते हैं जिससे कारोबार पर बुरा असर पड़े। इन्हीं अपेक्षाओं को जानने का प्रयास किया अमर उजाला ने।

इलेक्ट्रॉनिक : सकारात्मक कदम उठाए सरकार
जीएसटी की दरों में जो बदलाव किए गए, उन्हें नियंत्रित किया जा सकता था। जब ऐसे उत्पादों में लगातार बदलाव किए जाते हैं जिनकी शेल्फ लाइफ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों जैसी हो तो इसका पहला नुकसान उन डीलरों को होता है जो पूरी कारोबारी चेन की आखिरी कड़ी हैं और सीधे उपभोक्ता को डील करते हैं। आने वाले आम बजट के मद्देनजर अगले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार का संभवत: आखिरी ऐसा बजट होगा जो पूरे साल के लिए लागू होगा, ऐसे में उसे ऐसे प्रावधान करने होंगे जो 2019 के मध्य तक असर रखते हों। वहीं इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद सेक्टर में भारतीय कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार को सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।

- गणेश अग्रवाल, राजकुमार तेजवानी, किशोर कुकरेजा, पवन मनोचा, वीके जिंदल, सतपाल सिंह, मुकेश तेजवानी
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कपड़ा : प्रीमियम कपड़े व रेडीमेड पर ही लगे टैक्स
जीएसटी लगने से कपड़ा महंगा हो गया है। आम बजट में अब कपड़े व रेडीमेड पर कोई नया टैक्स न लगाएं जिससे उसकी कीमत बढ़ जाए। केंद्र सरकार को नया टैक्स लगाना चाहती है तो प्रीमियम कपड़े व रेडीमेड पर लगाए जिससे इनकम भी बढ़ेगी और इस तबके पर कोई फर्क भी नहीं पड़ेगा। सामान्य वर्ग के कपड़े को सस्ता करना चाहिए। कैसे करना है, यह केंद्र सरकार मंथन करें। इनकम टैक्स छूट की लिमिट पांच लाख रुपये हो जिससे जीएसटी से जिस टैक्स का बोझ बढ़ा उसकी बचत हो सके। सीनियर सिटीजन आयकरदाता कारोबारी का मुफ्त इलाज का प्रावधान हो।

- राकेश छाबड़ा ‘पम्मी’, अवतार सिंह, सुरेश खत्री, विजय अग्रवाल
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जनरल मर्चेंट : व्यापारी के लिए सरल हो टैक्स सिस्टम
केंद्र सरकार को आम बजट में आयकर को खत्म कर व्यापारी व ग्राहकों के लिए सरल टैक्स सिस्टम बनाना चाहिए। इससे केंद्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और व्यापारी व ग्राहकों को अपना टैक्स चुकाने के लिए वकील और कर सलाहकार के आगे-पीछे घूमना न पड़ेगा। इसके लिए केंद्र सरकार को नौकरी-पेशा संवर्ग पर उनके टर्नओवर पर न्यूनतम टैक्स लगाया जाए। बैंक खाते से कैश टर्नओवर पर टैक्स की कटौती कर ली जाए जिससे टैक्स की कटौती बैंक खुद करके आयकर विभाग के खाते में डिपॉजिट कर सके। जनरल मर्चेंट की उत्पादन व आयातित वस्तुओं पर टैक्स को लगाया जाए।

- विनोद अग्रवाल, प्रदीप पाल सिंह, नवीन कसेरा, रवींद्र गुप्ता

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सराफा : आयात शुल्क घटे तो सस्ते होंगे गहने
सराफा कारोबार को चमकाकर अधिक राजस्व अर्जित करना है तो केंद्र सरकार सोने व चांदी से आयात शुल्क घटाए। सोने व चांदी पर 10 फीसदी आयात शुल्क व तीन फीसदी जीएसटी से गहने की कीमत 13 फीसदी बढ़ जाती है। आयात शुल्क में कटौती होगी तो ग्राहकों को गहने सस्ते मिलेंगे। आयात शुल्क कम होने से सोने की दुुबई, नेपाल से तस्करी पर अंकुश लगेगा जिससे स्वदेशी सराफा कारोबार बढ़ेगा। ज्वैलरी हैंडीक्राफ्ट का तेजी से कारोबार बढ़ा है जिसके उत्थान के लिए स्पेशल जोन बनाया जाए। इससे कारीगरों को केंद्र सरकार अलग से सुविधाएं प्रदान करें।  

- विमल घनश्यानी, अभिनव निगम, राजू, संजय पाहूजा
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आमजन की आस: सुरक्षा की मिले गारंटी, न बढ़े किराया
राजनीतिक हित साधने के लिए ट्रेनों की संख्या बढ़ा दी जाती है। पर, पटरियां खस्ताहाल हैं। इससे हर साल हादसे हो रहे हैं। हम आम पैसेंजर हैं। हमें सुरक्षा की गारंटी चाहिए, लग्जरी सेवाएं नहीं। साथ ही ऐसी व्यवस्था बने कि कन्फर्म सीट मिल सके। यह कहना है शाहिद खां का। वह परिवारीजनों के साथ लखनऊ से मुगलसराय जा रहे थे। उन्होंने बताया कि बजट से बहुत उम्मीदें यात्रियों ने बांध रखी हैं। वहीं परवेज खां ने कहा कि लंबी दूरी की बेगमपुरा सरीखी ट्रेनों में खानपान की सुविधा नहीं है, जिसे दिया जाना चाहिए। स्वच्छ पीने के पानी व शौचालयों का होना भी जरूरी है। सिर्फ दावे नहीं, बल्कि हकीकत में काम होना चाहिए। वहीं तमन्ना ने कहा कि ट्रेनों व स्टेशनों पर औरतों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए जाने चाहिए। उनके साथ लारेब ने भी सफर कर रही थीं।

-शाहिद खां, परवेज खां, तमन्ना व लारेब
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ऑटोमोबाइल : टैक्स दरों में हो कमी
आम बजट इस क्षेत्र में काम कर रहे छोटे उद्योग को प्रोत्साहित करने वाला होना चाहिए। स्पेयर पार्ट्स और असेसरीज का एक बड़ा मार्केट इस सेक्टर में मौजूद है, जिसके बारे में अब तब देश के स्तर पर सोचा नहीं गया है, जबकि जीएसटी से लेकर उत्पादन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता तक, सभी का सीधा असर इस पर होता है। अपेक्षा है कि जीएसटी के बाद जिस तरह से कम रेंज की कारें सस्ती हुई हैं, उससे असेसरीज सेक्टर को भी तेजी मिलेगी, लेकिन आने वाले समय में इसे भुनाने के लिए टैक्स दरों को कम करने पर सरकार को फिर से विचार करना चाहिए।

-रणधीर सिंह, मुकेश राजपुत, इमरान, अहमद, राजेंद्र सोनकर, संतोष तिवारी, राम प्रसाद।
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