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बिल्डर की लापरवाही से तीन गधों संग जिंदा दफन हो गए आठ जानवर, तस्वीरें

Tue, 21 Jun 2016 09:53 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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मंगलवार को लखनऊ के राणाप्रताप मार्ग पर बन रही वाईएमसीए परिसर में ऑफिस कांप्लेक्स की बिल्डिंग के बेसमेंट में आठ बेजुबान दफन हो गए। बिल्डर की लापरवाही से यह हादसा हुआ।
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तड़के सुबह हुई बारिश में बेसमेंट में पानी भर गया। ऐसे में तीन मंजिल बेसमेंट की गहराई तक खोदी गई जगह को शटरिंग लगाकर सपोर्ट नहीं दिया गया। इससे मिट्टी ढहकर बेजुबान जानवरों के ऊपर आ गई। (इस दौरान उन्हें बचाने की कोशिश करते वहां मौजूद लोग।)
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एक दर्जन से अधिक गधे, खच्चर और घोड़े उस समय बेसमेंट की कच्ची जगह में मौजूद थे। इनमें से केवल चार गधों को जिंदा निकाला जा सका।

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13, राणाप्रताप मार्ग पर बन रहे इस व्यवसायिक निर्माण को करीब एक साल पहले शुरू किया गया था। इसके निर्माण के लिए अनुमति लखनऊ विकास प्राधिकरण से नेशनल काउंसिल ऑफ वाईएमसीए इंडिया के नाम से ली गई है।
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यहां मौजूदा समय में निर्माण चल रहा था लेकिन मंगलवार को हुए हादसे ने वहां सुरक्षा इंतजाम की कलई खोल दी। तेज बारिश के चलते सिकंदरबाग चौराहे के पास हो रहे इस निर्माण में मिट्टी ढ़ह गई। इससे आठ जानवरों की मौत हो गई। (मृत पाये गए ये जानवर)
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इसमें तीन गधे, तीन खच्चर और दो घोड़ों के शव देर शाम तक निकाले गए। केवल चार गधों को किसी तरह जिंदा निकाला गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम को वहां काम करने वाले श्रमिकों केसाथ करीब 10 घंटे लगे।
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सभी जानवरों केपैर बंधे हुए थे
रेस्क्यू ऑपरेशन के समय जब जानवरों को मिट्टी और वहां भरे पानी से निकाला गया। इस समय पता चला कि सभी जानवरों के पैर बंधे हुए थे। इसकी वजह से कोई भी जानवर वहां से भाग कर बाहर नहीं निकल सका। ऐसे में वहीं दम घुटने से जानवरों की मौत हो गई।

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पता चला कि एक दिन में दो गधे और एक आदमी आठ घंटे तक मिट्टी निकालकर बाहर पहुंचाता था। इसके लिये उसे साढ़े सात सौ रुपये मिलते थे। इन चंद रुपयों के लालच में जानवरों को बर्बर रूप से बांधकर रखा गया था।

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10 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही हजरतगंज और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। बेसमेंट के एक कोने में जहां गधे बंधे थे, वहां लगभग दस फिट तक पानी भर गया था। दलदली मिट्टी और पानी के बीच फंसे गधे चीखते रहे लेकिन उन्हें निकालने का रास्ता नहीं मिल रहा था।

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चीफ फायर ऑफिसर अभय भान ने मोर्चा संभाला और फिर पाइप लगाकर पानी निकाला गया। शाम लगभग पांच बजे तक चार गधों को जिंदा निकाल लिया गया। वहीं आठ गधे मृत अवस्था में निकाले गये।

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लापरवाही के चलते हुई दुर्घटना
बेसमेंट खुदाई और तीन फ्लोर की अंडरग्राउंड कार पार्किंग का काम बेहद ही लापरवाही से किया जा रहा है। सड़क किनारे बिल्कुल सीधे 50 फिट गहरा गड्ढा तो खोद दिया गया लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किये गये।

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इसी वजह से बारिश हुई तो पूरी की पूरी मिट्टी भरभरा कर दरक गई और नीचे आ गिरी। निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों ने मिट्टी रोकने के लिये न तो पिलर बनाये और न ही शटरिंग लगाई। कुछ फुट की दूरी पर वाईएमसीए की पुरानी बिल्डंग भी है।
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अगर मिट्टी ज्यादा दरक गई तो बिल्डिंग के गिरने का भी खतरा पैदा हो सकता है। गनीमत यह रही कि उस समय को श्रमिक अंदर बेसमेंट में सोया हुआ नहीं था। इससे नुकसान और बढ़ जाता।
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