मधुमेह का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं, लेकिन इससे डरने की नहीं, बल्कि सावधानी बरतने की जरूरत है। तमाम चिकित्सक भी मधुमेह की चपेट में हैं, लेकिन वे इसकी फिक्र नहीं करते हैं। बस थोड़ा सावधान रहते हैं। खानपान नियंत्रित करने के साथ ही सुबह टहलने जरूर जाते हैं। मधुमेह दिवस पर लखनऊ अमर उजाला ने इससे पीड़ित चिकित्सकों से बातचीत कर उनके फिट रहने का रहस्य जाना। पेश है चिकित्सकों से हुई बातचीत के अंश...
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प्रो. नरसिंह वर्मा
- फोटो : amar ujala
रोटी कम, फल ज्यादा खाता हूं
करीब 20 साल पहले रूटीन जांच के दौरान पता चला कि मैं मधुमेह से ग्रसित हूं। इसके बाद भोजन में रोटी, चावल कम कर दिया। भूख लगने पर 80 फीसदी सलाद, फल, सब्जी खाने लगा। रात में 11 बजे तक सो जाता हूं और सुबह पांच से छह बजे तक उठ जाता हूं। नित्यक्रिया के बाद 30 मिनट व्यायाम, योग, ध्यान करता हूं। सर्दी हो या गर्मी रोजाना 30 मिनट पैदल तेज चलना नहीं भूलता हूं। इसका नतीजा है कि मधुमेह का ग्राफ 20 साल पहले जितना था, उतना ही आज भी है। मैं खुद के मधुमेह पीड़ित होने की बात मरीजों को भी बताता हूं, ताकि उनका आत्मविश्वास बना रहे और नियंत्रित खानपान अपनाकर खुद को स्वस्थ रख सकें। - प्रो. नरसिंह वर्मा, केजीएमयू
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प्रो. आर के गर्ग
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सब खाता हूं मगर थोड़ा-थोड़ा
मुझे पांच साल पहले मधुमेह हुआ। शुगर 200 से अधिक हो गई थी। कुछ साथी चिकित्सकों का कहना था कि हाई लेवल होने की वजह से नियंत्रित कर पाना मुश्किल है, लेकिन हमने इसे नियंत्रित करने की ठानी। खाने-पीने में कोई खास कटौती नहीं करता। सब खाता हूं, लेकिन थोड़ा-थोड़ा। सुबह का नाश्ता भारी करता हूं। इसके बाद दोपहर का भोजन मामूली। बीच में भी दो से तीन बार कुछ न कुछ खाता रहता हूं। शाम के खाने में सलाद का प्रयोग ज्यादा करता हूं। सुबह उठने के बाद 40 से 45 मिनट जॉगिंग (तेजी से चलना) करता हूं। हर वक्त खुश रहने की कोशिश होती है। कोई काम गड़बड़ हुआ तो उसे लेकर परेशान नहीं होता हूं। अब 100 से 120 की स्थिति है। - प्रो. आरके गर्ग, विभागाध्यक्ष न्यूरोलाजी, केजीएमयू
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डॉ एसके सक्सेना
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सुबह-शाम दोनों वक्त चलाता हूं साइकिल
करीब 10 साल पहले मधुमेह की चपेट में आ गया था। एक साथी ने साइकिल चलाने और पैदल चलने की बात बताई। सुबह-शाम दोनों वक्त साइकिल चलाता हूं और पार्क में करीब 40 मिनट तेज गति से चलता हूं। कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा पैदल चलूं। खाने में सभी चीजें लेता हूं, लेकिन थोड़ा-थोड़ा। पेट को खाली नहीं रखता। कुछ न कुछ खाता रहता हूं। तली-भुनी और बाजार की चीजों से परहेज करता हूं। बाजार में कुछ खाना ही है तो फल खा लेता हूं। इसका असर यह हैकि मधुमेह 300 से घटकर 200 से आसपास रहता हैं। हर दूसरे माह जांच जरूर करता हूं। - डॉ. एसके सक्सेना, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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डेमो
वहीं जोड़ों में दर्द, झुनझुनाहट ही नहीं बल्कि दांतों का हिलना भी मधुमेह का संकेत है। ऐसी स्थिति में तत्काल जांच करानी चाहिए। यह खुलासा हुआ है केजीएमयू की शोध रिपोर्ट में। दांत हिलने वाले लोगों में 85 फीसदी में मधुमेह पाया गया था। केजीएमयू के मेडिसिन विभाग की टीम ने अलग-अलग विभागों में आने वाले मरीजों में मधुमेह के लक्षण को लेकर जांच की थी। मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डी हिमांशु की टीम ने शोध में पाया कि डेंटल यूनिट में दांत हिलने व दांत दर्द जैसी समस्या लेकर आने वाले मरीजों में 85 फीसदी मधुमेह से पीड़ित पाए गए। ऐसे मरीजों की मसूड़े की नली सूख जाती है। करीब दो साल पहले हुए रिसर्च के आधार पर अब दांत हिलने, कटकटाने या झंझनाहट की शिकायत करने वाले मरीजों की शुगर की भी जांच कराई जाती है।
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डॉ डी हिमांशु
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पहचानें लक्षण
डॉ. डी हिमांशु के मुताबिक, वजन का अचानक कम होने लगना, पेशाब बार-बार आना, भूख ज्यादा लगना, बार-बार इंफेक्शन होना, पैरों में झनझनाहट, दांतों में दर्द, जोड़ों और कंधे में दर्द, कमर का अचानक बढ़ना मधुमेह के लक्षण हैं। ऐसी स्थिति में जांच कराना चाहिए। 35 साल की उम्र पार करने के बाद हर छह माह में एक बार शुगर की जांच जरूर करानी चाहिए। सामान्य व्यक्ति की फास्टिंग 80 से 100 और पीपी 140 से नीचे रहे तो मधुमेह नियंत्रित माना जाता है।
ऐसे करेें बचाव
मधुमेह में लोग दवाएं लेने लगते हैं, लेकिन दवा से कहीं ज्यादा प्रभावी होती है। एक्सरसाइज, सुबह का तेज टहलना। टहलते वक्त गति इतनी तेज हो कि हार्ट बीट बढ़े और शरीर से पसीने छूटें। पेटे खाली न रखें। सुबह का नाश्ता ज्यादा लें और शाम का भोजन कम कर दें।