एसीएमओ डॉ. केपी त्रिपाठी का तर्क है कि लखनऊ में एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान है। इसके अलावा कॉर्पोरेट अस्पताल भी हैं। इनमें पूरे प्रदेश के मरीज आते हैं। इससे यहां का ग्राफ अधिक दिख रहा है। मौत के आंकड़ों को लेकर घबराने के बजाय लोगों को वायरस रोकने पर जोर देना होगा। हर व्यक्ति मास्क लगाए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, बहुत जरूरी हो तभी घर से निकले तो यह चेन टूटेगी। संक्रमितों की संख्या कम होगी तो मृत्यु दर खुद कम हो जाएगी।