रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हिंदुस्तान को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड(एचसीबीएल) पर
शुक्रवार को रोक लगा दी। बैंक अब न किसी का पैसा जमा कर सकेगा न ही अपने
खाताधारकों को एक लाख से अधिक का भुगतान कर सकेगा।
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'बैंक डूबते' ही लखनऊ में हड़कंप, पैसा निकालने के लिए लगीं कतारें
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इस बात की जानकारी मिलने के साथ लखनऊ में अफरा-तफरी के हालात बन गए। जिन
लोगों के खाते इन बैंकों में हैं वह सुबह से ही वहां पहुंच गए। बैंक खुलने
से पहले बैक के बाहर लंबी-लंबी कतारे नजर आने लगीं।
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लखनऊ में इस बैंक की करीब हर शाखा में यह कतारे नजर आईं। लोग इस बात की चिंता में दिखे कि आखिर उनके पैसे का क्या होगा।
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लखनऊ शहर में मुख्य रूप से इस बैंक की शाखाएं जानकीपुरम, कपूरथला, गोमती
नगर सहारा अस्पताल के पास, नादान महल रोड और आलमबाग में हैं।
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इन सभी जगहों पर पैसे निकालने वालों की भीड़ सुबह से ही जमा दिखी। इस भीड़
को समझाने और उन्हें भरोसा दिलाने के लिए वहां पर कोई भी बैंक का अधिकारी
मौजूद नहीं थी।
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रकम डूबने की चिंता में खाताधारक देर रात तक बैंक की शाखाओं में जमे रहे।
रात से जमा हुई यह भीड़ सुबह होते-होते एक सैलाब में बदल गई।
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बैंक की जानकीपुरम और नादान महल रोड शाखाओं में नाराज ग्राहकों ने तोड़फोड़
भी की। आरबीआई के एजीएम अजित प्रसाद ने बताया कि एचसीबीएल की खराब माली
हालत की जांच के बाद जनहित में यह पाबंदी छह माल के लिए लगाई गई है। इसके
बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।
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नए नियम के बाद यह बैंक आरबीआई की अनुमति के बिना बैंक न कोई लोन दे सकेगा न
उसे रिन्यू कर सकेगा। उसे कोई निवेश करने की अनुमति नहीं होगी। कोई नया
डिपॉजिट स्वीकार नहीं कर सकेगा, फंड नहीं ले सकेगा।
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मामले पर एचसीबीएल के सीईओ पवन कपूर का कहना है कि बैंक के 50 हजार
ग्राहकों के करीब 180 करोड़ रुपये हमारे पास जमा हैं और मौका मिलेगा तो
हफ्ते भर में पैसा लौटा देंगे। लेकिन आरबीआई ने इसका मौका ही नहीं दिया।