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'भारत माता की जय' के नारों के बीच शहीद जवान को दी गई अंतिम विदाई, उमड़ पड़ा जनसैलाब, तस्वीरें

Wed, 07 Oct 2020 12:55 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायबरेली
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- फोटो : amar ujala
रायबरेली में सीआरपीएफ के शहीद जवान शैलेंद्र सिंह के पार्थिव शरीर का डलमऊ गंगा तट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर सीआरपीएफ जवानों ने उन्हें सलामी दी।

शहीद शैलेंद्र की अंतिम यात्रा पर जनसैलाब उमड़ पड़ा और भारत माता की जय के नारों के बीच अंतिम संस्कार किया गया।
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- फोटो : amar ujala
अंतिम यात्रा पर गांव के आसपास के लोग इकट्ठे हो गए। भीड़ इतनी थी कि लोग शैलेंद्र के दर्शन के लिए गंगा पुल और पेड़ों पर चढ़ गए।
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- फोटो : amar ujala
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के सोपोर में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ जवान शैलेंद्र सिंह शहीद हो गए थे।

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- फोटो : amar ujala
शैलेंद्र सिंह के परिजन बताते हैं कि उसमें बचपन से ही देश के लिए कुछ कर गुजरने और मर मिटने का जुनून सवार था। अक्सर वह अपने पिता से कहा करता था कि उसे कोई नौकरी नहीं चाहिए। उसका सपना है कि वह देश की तरफ आंख उठाने वालों को कड़ा सबक सिखाए।
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- फोटो : amar ujala
शहीद के चाचा वीरेंद्र सिंह बताते हैं कि शैलेंद्र कहता था कि जब भी हमारा कोई साथी जवान शहीद होता है तो बहुत दुख होता है। इसलिए जब मौका मिलता है मैं आतंकियों और पाकिस्तानी सेना से मोर्चा लेकर उन्हें सबक सिखाने का काम करता हूं। उसका यही जुनून देश सेवा में समर्पित हो गया।
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- फोटो : amar ujala
उन्होंने बताया कि शहीद शैलेंद्र सिंह गांव के संगी-साथियों के साथ सेना में जाने की तैयारी करता था। इसके लिए रोज पांच किलोमीटर की दौड़ लगाने के साथ ही शारीरिक व्यायाम किया करता था। (सीआरपीएफ जवानों ने अंतिम सलामी दी।)
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- फोटो : amar ujala
पिता नरेंद्र बहादुर सिंह कहते हैं कि शैलेंद्र को देश भक्ति की फिल्में देखने में रुचि रहती थी। वर्ष 2008 में मेहनत के बाद सीआरपीएफ में नौकरी मिली और सेना में जाने का उसका ख्याब पूरा हुआ। 10 साल पहले चांदनी से उसकी शादी हुई थी। शादी बाद उसका एक बेटा कुशाग्र है।(अंतिम संस्कार के लिए मौजूद ग्रामीण।)

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रायबरेली - फोटो : amar ujala
शहर में मकान बनाने के बाद भी शैलेंद्र का गांव जाना कम नहीं हुआ। छुट्टी पर आने पर वह बराबर गांव जाता था और अपने साथियों से मुलाकात करता था। (अंतिम संस्कार का एक दृश्य।)

 

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रायबरेली - फोटो : amar ujala
उन्होंने बताया कि जब शैलेंद्र छुट्टी से घर आता था तो साथ में खेल किट लाता था और गांव के युवाओं को देता था। साथ ही युवाओं में सेना में जाने के लिए जोश भरता था। उन्हें प्रैक्टिस कराता था।

 
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- फोटो : amar ujala
जवान के अंतिम दर्शन के लिए मौजूद ग्रामीण।
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