पिता नरेंद्र बहादुर सिंह कहते हैं कि शैलेंद्र को देश भक्ति की फिल्में देखने में रुचि रहती थी। वर्ष 2008 में मेहनत के बाद सीआरपीएफ में नौकरी मिली और सेना में जाने का उसका ख्याब पूरा हुआ। 10 साल पहले चांदनी से उसकी शादी हुई थी। शादी बाद उसका एक बेटा कुशाग्र है।(अंतिम संस्कार के लिए मौजूद ग्रामीण।)