लखनऊ विश्वविद्यालय में शनिवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 31 मेधावियों को मेडल और डिग्री देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में कुल 97 मेधावियों को 192 मेडल प्रदान किए गए। इनमें से 84 फीसदी मेडल छात्राओं के नाम हैं। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद गृहमंत्री राजनाथ सिंह को मानद उपाधि भी प्रदान की गई।
विज्ञापन
2 of 5
सेल्फी लेती छात्राएं
- फोटो : amar ujala
इस मौके पर गृह मंत्री ने कहा कि उत्कृष्ट बनने की कोशिश करो उसके लिए आपको जीवन भर काम करना पड़ेगा। स्वतंत्र भारत में नेताओं की कथनी और करनी में अंतर के कारण लोगों का भरोसा उठ गगया। इसी भरोसे को युवकों और हम सबको मिलकर फिर से जीतना होगा। समाज और देश के लिए राजनीति होनी चाहिए।
विज्ञापन
3 of 5
लखनऊ यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह।
- फोटो : amar ujala
राजनाथ सिंह ने कहा कि जिसने किसी भी प्रकार की शिक्षा-दीक्षा दी है, वह गुरु है, उसका सम्मान करना बहुत जरूरी है। ये दीक्षांत समारोह है न कि शिक्षांत समारोह, इसलिए शिक्षा अनवरत चलती रहेगा, जो चरित्र का निर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत के फर्स्ट ग्लोबल यूथ है। उनके सपनों का भारत बनाने और भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए आज के यूथ को संकल्प लेना होगा।
4 of 5
लखनऊ विवि में दीक्षांत समारोह।
- फोटो : amar ujala
राजनाथ सिंह ने एक वाक्या सुनाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री बनने के बाद एक बार मैं चंदौली से गुजर रहा था तब मौलवी साहब अपने हाथों में फूलों का हाल लिए मेरे इंतजार में खड़े थे। मैंने रुककर उनके चरण छुए तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए। राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं भारत का गृहमंत्री हूं पर मैं अपनी मर्यादा कभी नहीं तोड़ता। यही आपको भी करना चाहिए। मर्यादा का पालन आपको पूज्य बना देता है और ये सोच शिक्षा से आती है।
लखनऊ विवि में दीक्षांत समारोह।
- फोटो : amar ujala
छोटी सी बर्तन की दुकान चलाने वाले मो. इस्लाम को यकीन नहीं हो रहा कि उनकी बिटिया गुलशन जहां ने छह मेडल हासिल किए हैं। एमए एआईएच विभाग में टॉप कर छह मेडल हासिल करने वाली गुलशन ने बताया कि उनके पिता बर्तन की दुकान चलाते हैं। बड़ा भाई उनकी मदद करता है जबकि बाकी दो अन्य भाई प्राइवेट जॉब कर घर खर्च में मदद करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से वे पढ़ नहीं सके, लेकिन सबने मिलकर गुलशन को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। गुलशन भी उनकी उम्मीदों पर खरी उतरीं। एमए में छह मेडल हासिल करने वाली गुलशन शिक्षक बनना चाहती हैं ताकि वह समाज को भी शिक्षित कर सकें।