लखनऊ मेट्रो भूमिगत रूट का काम तेजी से पूरा करने के लिए काम कर रहा है। इसके लिए रोजाना 22 मीटर तक पटरी बिछाई जा रही है। 10 दिन में 217 मीटर पटरी अब तक बिछाई जा चुकी है। 12 नवंबर से काम शुरू किया गया है। अप लाइन में 812 मीटर लंबाई में पटरी बिछाई जानी है।
विज्ञापन
2 of 4
ऐसे बिछाई जाती है पटरी
एलएमआरसी के प्रवक्ता अमित श्रीवास्तव ने बताया कि मास स्प्रिंग सिस्टम का इस्तेमाल मेट्रो में किया जा रहा है। ट्रैक बिछाने का काम काफी जटिल होता है। यह ध्यान रखना होता है कि ट्रेन के आने-जाने के समय कंपन व ध्वनि को कम किया जा सके। सबसे पहले एक स्प्रिंगनुमा शीट बिछाई जाती है। इसके ऊपर ट्रैकबेड बनाया जाता है, जो कंक्रीट का होता है। फिर इसके ऊपर स्टील की पटरी बिछाई जाती है।
विज्ञापन
3 of 4
तीन जगह तीव्र घुमाव बने चुनौती
मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि सचिवालय से हजरतगंज के बीच तीन जगह पर तीव्र घुमाव हैं। इन घुमाव के लिए पटरियों को ढालना और उनको सुरंग के अंदर ले जाना एक बड़ी चुनौती है। यह चुनौती डाउन लाइन में भी मिलेगी।
पूरे 3.5 किमी में कुल 10 तीव्र घुमाव हैं। सचिवालय से हजरतगंज के बीच तीन घुमाव को चुनौती इसलिए माना जा रहा है। अगर टीम ने इस चुनौती को पूरा कर लिया। ऐसे में बाकी सात के लिए टीम के पास अनुभव हो जाएगा।