दिल्ली से पटना जा रहे झुनकूराम भतीजे के साथ।
- फोटो : amar ujala
दिल्ली से पटना : दिव्यांग चाचा को व्हीलचेयर समेत साइकिल से टोचेन कर ले जा रहा छोटू
बिहार के मूल निवासी 55 साल के झुनकूराम दोनों पैरों से निशक्त हैं। दिल्ली के विश्वासनगर मेें एक कारखाने में काम करते थे। लॉकडाउन के बाद से करीब दो माह से कोई काम नहीं था, वहीं फंसे हुए थे। पैसे भी खत्म हो चुके थे। घर जाने का कोई साधन नहीं था। हिम्मत करके तीन दिन पहले दिल्ली से भतीजे छोटू के साथ पटना के लिए रवाना हुए। झुनकूराम बताते हैं कि साइकिल से एक रस्सी बांधकर व्हीलचेयर समेत चाचा को लेकर छोटू ने सफर की शुरुआत की। जो कुछ भी थोड़ा सा लइया-चना पास में था, खत्म हो गया। रास्ते में तकरीबन 80 किलोमीटर तक भूखे रहकर दोनों चलते रहे। आगरा के पास कुछ लोगों ने बिस्किट और पानी दिया तो शरीर में कुछ जान आई। रात में भी सफर जारी रहा, जब थक गए तो रास्ते में व्हीलचेयर पर ही चाचा-भतीजे थोड़ी देर के लिए बारी-बारी से सोते रहे क्योंकि डर था कि कहीं कोई साइकिल लेकर न चला जाए। फिर इटावा, औरैया, कानपुर, उन्नाव होते हुए तीन दिन में लखनऊ पहुंचे। झुनकूराम कहते हैं कि इतनी तकलीफ सहन की है, भूखे रहे हैं, बस एक बार घर पहुंच जाएं तो फिर कभी कमाने इतनी दूर नहीं जाएंगे। छोटू बोला, हम जानते हैं कि मंजिल अभी दूर है, करीब 550 किलोमीटर से ज्यादा चल चुके हैं।