लॉकडाउन खुलने के बाद से मोबाइल फोन कारोबार का ट्रेंड बदल गया है। अब सस्ते मोबाइल खूब बिक रहे हैं, लेकिन महंगा मोबाइल खरीदने वाले शोरूम से वापस लौट रहे हैं। वजह, बैंक नए ग्राहकों को फाइनेंस करने से हिचक रहे हैं तो चार्जेज भी महंगे हो गए हैं। हालांकि उन ग्राहकों को फोन फाइनेंस कराने में कोई दिक्कत नहीं हुई, जिनका रिकॉर्ड पहले से अच्छा था। कुल मिलाकर लॉकडाउन के पहले और बाद के कारोबार में कोई फर्क नहीं आया है। पहले भी शहर का महीने का कारोबार 80 करोड़ रुपये का था और अब भी उतना ही है। बदलाव सिर्फ कारोबार के ट्रेंड में ही आया है।
लॉकडाउन से पहले राजधानी में रोजाना लगभग ढाई हजार मोबाइल बिकते थे, इनमें दो हजार मोबाइल पांच हजार से 12 हजार रुपये वाले और पांच सौ महंगे मोबाइल 15 हजार से एक लाख रुपये वाले थे। जो महंगे मोबाइल पहले बिक रहे थे, उनमें 90 प्रतिशत खरीदार फाइनेंस कराते थे। यह सेल खास तौर पर मोबाइल के करीब सौ बड़े शोरूमों में लगती थी। इनमें से महंगे मोबाइल बेचने का हब हजरतगंज के अशोक मार्ग स्थित श्रीराम टावर है।
लखनऊ मोबाइल एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जौहर के मुताबिक, वर्तमान में आठ सौ शोरूम व दुकानों के कारोबारी सस्ते और महंगे तीन हजार मोबाइल रोजाना बेच रहे हैं। इसकी वजह लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शुरू हुई पढ़ाई है। इन तीन हजार मोबाइल में सौ मोबाइल ही महंगे बिक रहे हैं, जिनकी कीमत 15 हजार से एक लाख रुपये है। इनमें भी एक लाख कीमत के चार से पांच मोबाइल ही शामिल है, जबकि 2900 मोबाइल पांच हजार से 12 हजार रुपये वाले बिक रहे हैं। ऐसे मोबाइल सर्वाधिक नाका बाजार से बिकते हैं।
सेकंड हैंड मोबाइल की खरीद-फरोख्त ठप
कारोबारियों ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से सेकंड हैंड मोबाइल की खरीद फरोख्त भी ठप है। अधिकतर कंपनियों ने अब तक मोबाइल के नए मॉडल मार्केट में नहीं उतारे हैं। इससे जो शौकीन 30 से 40 हजार रुपये का मोबाइल खरीदकर छह माह के बाद उसे बेचकर नया खरीदते थे, वे बाजार में नहीं आ रहे हैं, जबकि बाजार में सेकंड हैंड मोबाइल के खरीदार रोजाना आते हैं।