इसमें कोई दो राय नहीं कि कोरोना काल और लॉकडाउन ने लोगों को पहले से कहीं ज्यादा रचनात्मक बनाया है। इस दौरान मिले वक्त में लोगों ने अपने शौक को बहुत वक्त दिया है। फोटोग्राफी जहां शौक है, वहीं एक कला भी है, एक जुनून भी है। लॉकडाउन में उन्होंने अपने इस शौक को किस तरह से धार दी, उनके कैमरे ने महामारी के इस कठिन वक्त को किस तरह से देखा, यह जानने और सबको बताने की कोशिश की अमर उजाला ने। विश्व फोटोग्राफी दिवस 19 अगस्त को मनाया जाता है। अपने पाठकों से इस मौके पर अमर उजाला ने प्रविष्टियां आमंत्रित की थीं, जिनमें से शीर्ष 10 फोटोग्राफ को अमर उजाला में प्रकाशित किया गया (19 अगस्त का अखबार देखें)।
इनका चयन करने वाले निर्णायक मंडल में शामिल हैं जाने-माने छायाकार डॉ. अनिल रिसाल सिंह, डॉ. भूपेश सी लिटिल, डॉ. तूलिका साहू। निर्णायक मंडल द्वारा सराही गई कुछ और तस्वीरों को अमर उजाला डॉटकॉम पर देखा जा सकता है। डॉ. अनिल रिसाल सिंह संस्कृति मंत्रालय के अधीन नेशनल रिर्सच लेबोरेटरी फार कंजरवेशन ऑफ कल्चरल प्रॉपर्टी के फोटो डिवीजन के पूर्व प्रमुख के अलावा कई अहम पदों पर रह चुके हैं। वहीं, वर्तमान में जामिया मिलिया इस्लामिया विवि में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. लिटिल फिजी नेशनल यूनिवर्सिटी में क्रिएटिव आर्ट्स विभाग और लखनऊ विश्वविद्यालय में एप्लाइड आर्ट एंड फोटोग्राफी में पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। डॉ. तूलिका साहू फोटोग्राफी में पीएचडी करने वाली देश की पहली महिला हैं।
(सराही गई तस्वीर, रिदिम, पलियां कलां।)
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विश्व फोटोग्राफी दिवस
- फोटो : amar ujala
सबसे आवश्यक है दृष्टि
सबसे आवश्यक है ‘‘दृष्टि’’ !!! सभी फोटोग्राफर्स को सबसे अधिक इसी पहलू पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। दृष्टि ही उन्हें औरों से अलग और श्रेष्ठ बनाती है। महंगा या तकनीकी रूप से अधिक अच्छा कैमेरा तो कोई भी ले सकता है एवं तकनीकी विशेषज्ञता व्यक्ति में अभ्यास से विकसित हो ही जाएगी, लेकिन किसी फोटो को भिन्न प्रकार से कैसे लेना है ये सिर्फ वही कर सकता है, जिसके पास किसी विषय को अलग ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता हो और ये केवल ‘‘दृष्टि’’ विकसित होने पर ही संभव है। - डॉ. भूपेश चंद्र लिटिल
(तस्वीर- सोमेश, गोमती नगर)
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विश्व फोटोग्राफी दिवस
- फोटो : amar ujala
फोटोग्राफी एक उभरता हुआ कॅरियर
फोटो ग्राफी एक उभरता हुआ कॅरियर है। एक बेहतर फोटोग्राफर बनने के लिए बारीकियों को सीखना जरूरी है। फैशन इंडस्ट्रीज, कॉर्पोरेट और इंडस्ट्रियल सेक्टर में संभावनाएं बढ़ी हैं। फोटोग्राफी से ग्लैमर भी जुड़ चुका है। तकनीकी रूप से सक्षम होने पर इस क्षेत्र में संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। - डा. तूलिका साहू
(तस्वीर- अमन केसरवानी, जानकीपुरम्)
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विश्व फोटोग्राफी दिवस
- फोटो : amar ujala
जरूरी है व्यावहारिक ज्ञान
फोटो खींचते समय हमें सबसे पहले अपने सब्जेक्ट पर फोकस करना होगा। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज है लाइट या प्रकाश का इस्तेमाल करने की काबलियत। तस्वीर में गहराई लाने में इसका अहम योगदान होता है। यही वह काबलियत है जो एक फोटोग्राफर को दिखानी होती है। फोटोग्राफर बनने के लिए व्यावहारिक ज्ञान ज्यादा जरूरी है। - डॉ. अनिल रिसाल सिंह