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रामायणकालीन नजर आएगा राम मंदिर परिसर, बनेंगे चार गोपुरम, देखकर अभिभूत हो जाएंगे श्रद्धालु

Wed, 19 Aug 2020 09:30 AM IST
प्राची प्रियम नितिन मिश्र, अयोध्या
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राम मंदिर परिसर का प्रस्तावित मॉडल - फोटो : अमर उजाला
पांच अगस्त को हुए भूमि पूजन के बाद रामनगरी में दिव्य-अलौकिक राममंदिर निर्माण की परिकल्पना भी अब मूर्त रूप लेने लगी है। दूसरी तरफ ट्रस्ट की मंशा है कि राममंदिर परिसर रामायण कालीन दिखना चाहिए, इसके लिए कुछ ऐसी योजनाएं बनी हैं, जिनसे मंदिर परिसर पहुंचते ही रामभक्तों के जेहन में त्रेतायुग जीवंत होता प्रतीत होगा।

 
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राम मंदिर परिसर का प्रस्तावित मॉडल - फोटो : अमर उजाला
श्रीराममंदिर में चार प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे जिन्हें गोपुरम के नाम से जाना जाएगा। इसके अतिरिक्त रामकथा कुंज, राम म्यूजियम सहित श्रीराम के जीवन पर शोध के लिए शोध संस्थान व गुरुकुल की भी स्थापना होगी। राममंदिर को विश्व का सबसे बड़ा तीर्थस्थल बनाने की योजना है। रामजन्मभूमि परिसर को कुछ इस तरह विकसित किया जाएगा कि प्रवेश करते ही श्रद्धालु व भक्तों को रामायणकालीन समय का अहसास होने लगे। 

 
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राम मंदिर परिसर का प्रस्तावित मॉडल - फोटो : अमर उजाला
रामकथा कुंज में भगवान राम के जीवन प्रसंगों को दर्शाती 125 मूर्तियां स्थापित की जाएंगी, जो पूरी रामायण को दर्शाती नजर आएंगी। राममंदिर तक श्रद्धालु आसानी से पहुंच सके इसके लिए हाईवे से राममंदिर परिसर तक चार कॉरीडोर भी बनेंगे। यह कॉरिडोर फोरलेन की शक्ल में रामायणकालीन दृश्यों से सुसज्जित होंगे। परिसर की चारों दिशाओं में कुल चार प्रवेश द्वार होंगे जिन्हें गोपुरम के नाम से जाना जाएगा। 

 

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राम मंदिर परिसर का प्रस्तावित मॉडल - फोटो : अमर उजाला
दो मुख्य द्वार और दो आपात द्वार होंगे। परिसर के मंदिर से अलग झांकी के माध्यम से राममंदिर के लिए 500 वर्षों तक हुए संघर्ष का इतिहास भी म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी को राममंदिर आंदोलन की पूरी जानकारी हो सके। इसके अलावा ट्रस्ट ने परिसर स्थित 11 प्राचीन स्थलों का भी सर्वे किया है, सर्वे में यहां राम युग के साक्ष्य मिले हैं इनका भी सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। 

 
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राम मंदिर परिसर का प्रस्तावित मॉडल - फोटो : अमर उजाला
रामलला के परिसर में जो भी काम होगा वह गुणवत्तापूर्ण होगा। राम जन्म भूमि परिसर के अंदर गुरुकुल की स्थापना होगी, जिससे बड़े पैमाने पर वेद पाठी बालक रामसंस्कृति व रामायण की शिक्षा ले सकें। भगवान राम पर शोध करने के लिए शोध संस्थान की स्थापना सहित, प्रसाद स्थल, धर्मशाला, भजन स्थल, कथा मंडप सहित कई योजनाएं भी हैं।
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