क्या आप जानते हैं कि बासी भोजन, सड़ी-गली सब्जियों और उनके छिलके से भी बागवानी हो सकती है। चौंकिए मत, केजीएमयू ने ऐसा कर दिखाया है। यहां बागवानी में अब रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं होता। परिसर के पौधों को वर्मी कंपोस्ट और फूड कंपोस्ट ही दी जाती है। इससे हर माह 15 हजार रुपये की बचत हो रही है। इतना ही नहीं कई डॉक्टर घर के कूड़े को भी केजीएमयू लाते हैं। इनकी बिक्री से मिलने वाले रुपयों से गरीब मरीजों की मदद होती है। केजीएमयू की कैंटीन में रोजाना करीब पांच हजार मरीजों का खाना बनता है। इसके लिए आने वाली सब्जियों के छिलके, छंटाई में निकलने वाली सड़ी-गली सब्जियों एवं मरीजों से बंटने के बाद बचे भोजन को फेंका नहीं जाता है, बल्कि उससे खाद बनाई जाती है। इसके लिए फूड कंपोस्ट मशीन लगाई गई है।