राजधानी लखनऊ में मोबाइल गेम खेलने से रोके जाने पर मां की हत्या कर देने की घटना से हर कोई सन्न है। वहीं, मनोचिकित्सकों के अनुसार इसकी बड़ी वजह गेमिंग डिसॉर्डर है। उनके अनुसार अगर आपका बच्चा चार घंटे से ज्यादा मोबाइल के स्क्रीन पर समय बिता रहा है तो वह उसका लती हो सकता है। यह लत हद से ज्यादा बढ़ने पर बच्चे गेम और वास्तविक जीवन में अंतर करना बंद कर देते हैं। यहां तक कि गेम की घटनाओं को वास्तविक जीवन में कर देते हैं।
केजीएमयू के मनोरोग विभाग के डॉ. पवन कुमार गुप्ता के अनुसार गेमिंग डिसॉर्डर की पहचान बहुत जरूरी है। सही समय पर ऐसा होने से इलाज संभव है। वहीं, देरी पर परिणाम गंभीर हो सकते हैं। अगर आपका बच्चा ज्यादा समय तक गेम खेलता है, चिड़चिड़ा हो रहा है, सही से सो नहीं रहा तो ये गंभीर खतरे के संकेत हैं।
ज्यादा देर तक गेम खेलने की वजह से बच्चे हर वक्त उसके बारे में ही सोचते रहते हैं। यहां तक कि गेम नहीं खेलते समय भी उनका दिमाग उसी में चल रहा होता है। वीडियो गेम की ग्राफिक और थ्रीडी इमेज उन्हें ज्यादा आकर्षित करती है और वे इससे अलग नहीं सोच पाते हैं।