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घोर लापरवाही, जिसका बच्चा जिंदा था उसे सौंप दी लाश और फिर...

Sun, 13 Nov 2016 01:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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जिसका बच्चा एनआईसीयू में सांसे ले रहा था उसे दूसरे के बच्चे का शव थमा दिया। रोता-बिलखता परिवार शव लेकर चला भी गया। गलती का पता चला तो डॉक्टरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। हंगामा शुरू होते ही डॉक्टर शव लाने के लिए भागे। जब तक डॉक्टर पारा के बुद्धेश्वर इलाके पहुंचे शव को दफनाने की रस्मे चल रही थीं। इधर बच्चे के शव के लिए 10 घंटे तक मां बिलखती रही। दौड़ते-भागते घोर लापरवाही की ये कहानी है केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के बाल रोग विभाग की।
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बस्ती निवासी शंभू के एक माह के बच्चे को फेफड़े में संक्रमण की शिकायत थी। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया। दादा रामपूजन ने बताया कि मंगलवार को लोहिया, झलकारीबाई बलरामपुर अस्पताल का चक्कर लगाया और हर जगह से डॉक्टरों ने चलता कर दिया। बृहस्पतिवार को ट्रॉमा सेंटर पहुंचे तो डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताकर चौथे तल पर स्थित एनआईसीयू के बेड नंबर एक पर भर्ती कर दिया।
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शुक्रवार सुबह छह बजे वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉ. शालिनी ने बताया कि बच्चे की मौत हो गई है। डॉक्टर ने शव को लपेटने के लिए कपड़ा मंगाया। इसी बीच दूसरे डॉक्टर ने बेड नंबर 14 पर भर्ती राजधानी के बुद्धेश्वर के निजामुद्दीन का एक महीने के बेटे को मृत घोषित कर दिया। जबकि बेड नंबर एक पर भर्ती बच्चे का शव उनको सौंप दिया।

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निजामुद्दीन नवजात का शव लेकर चले गए। इसी बीच रामपूजन अपने नवजात पोते का शव लेने के लिए कपड़ा लेकर एनआईसीयू पहुंचे। तब डॉ. शालिनी और दूसरे डॉक्टर को अपनी गलती का पता चला।  सामने आया कि जिस परिवार को नवजात  का शव दिया है उनका बच्चा तो जिंदा है। रामपूजन डॉक्टरों की लापरवाही से नाराज होकर हंगामा करने लगे।
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रो-रोकर बेसुध हो गई मां...
सुबह छह बजे डॉक्टरों ने शंभू को बताया कि बच्चा मर गया।  वो बच्चे का चेहरा आखिरी बार देखने के लिए चीखने लगी तो एनआईसीयू के डॉक्टरों ने उसे डांटा। इसी बीच पता चला कि लाश दूसरे को दे दिया गया है।  शाम चार बजे के करीब मृत बच्चे का शव मिला तो वो चीख पड़ी।
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... और बद्धेश्वर के लिए रवाना हुए डॉक्टर
डॉक्टरों को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने मामले की जानकारी ट्रॉमा प्रशासन को दी। ट्रॉमा प्रशासन ने आनन-फानन में डॉक्टरों को रिकॉर्ड में दर्ज पते के आधार पर बुद्धेश्वर भेज दिया। डॉक्टरों की टीम वहां पहुंची तो पता चला कि निजामुद्दीन बच्चे के शव को दफनाने के लिए कब्रिस्तान में हैं। डॉक्टर भागते हुए कब्रिस्तान पहुंचे तो वहां बच्चे को दफनाने की रश्म अदाएगी हो रही थी।
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ड्यूटी बदलने के समय हुई घटना
इस पर केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. हैदर अब्बास का कहना है कि बच्चे की मौत के बाद शव दूसरे परिवारीजनों को सौंपने का मामला सामने आया था। ये घटना सुबह आठ और नौ बजे की शिफ्ट के बीच ड्यूटी बदलने के दौरान हुई थी। जानकारी के बाद डॉक्टरों को शव तलाशने के लिए भेजा गया था। कुछ घंटों बाद मृत बच्चे का शव उसके परिवारीजनों को सौंप दिया गया था। डॉक्टरों को चेतावनी दी गई है कि  इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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