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लखनऊ के मेधावियों ने सीए की परीक्षा में रचा इतिहास, साझा किए अपने सक्सेस मंत्रा

Fri, 17 Jan 2020 03:22 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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वैभव, उज्जवला और सौम्या गर्ग - फोटो : अमर उजाला
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने बृहस्पतिवार को फाइनल परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया। लखनऊ ने पहली बार इतिहास रचते हुए सीए की ऑल इंडिया टॉप 50 में तीन सीए दिए हैं। सीए वैभव अग्रवाल ने ऑल इंडिया 34वीं रैंक, सीए उज्जवला हरायण ने ऑल इंडिया 36वीं और सीए सौम्या गर्ग ने ऑल इंडिया 41वीं रैंक हासिल की है। राजधानी से 600 से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी थी। इसमें से 50 छात्र फाइनल परीक्षा उत्तीर्ण कर सीए बन गए हैं। सफलता हासिल करने वालों में सर्वप्रिय तिवारी, उत्कर्ष भार्गव, अनम अंजुम, प्रतीक निगम, लवकुश तिवारी, कोमल अग्रवाल, स्मृति तिवारी, ऐश्वर्य साहू, सत्यार्थ सक्सेना, प्रतिनीश सिंह, अनुज पाठक, सरफराज, शकील, महक मेहरोत्रा, देविका टंडन, चंद्र प्रकाश, सत्यम अग्रवाल, प्रगति तेजवानी, रौनक विशनानी और राहित गुप्ता शामिल हैं। आईसीएआई के लखनऊ शाखा के चेयरमैन सीए जयंत पांडेय, वाइस चेयरमैन सीए राहुल वर्मा, सचिव सीए रवीश चौधरी, सीए मेधा अरोरा और स्टूडेंट विंग की चेयरपर्सन मोहसनीन मिर्जा ने छात्रों को बधाई दी है।
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सीए वैभव अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
धैर्य और लगन से ही मिलेगी सफलता
सीए का सिलेबस बहुत बड़ा होता है। इसलिए की पढ़ाई के लिए लगन के साथ धैर्य जरूरी है। मैंने इसी मंत्र को ध्यान में रखा और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। आगे भविष्य में प्रैक्टिस करना चाहता हूं। पिता मुकेश अग्रवाल व्यापारी और मां सपना अग्रवाल गृहिणी हैं। मेरी तैयारी में परिवारीजनों का पूरा सपोर्ट रहा। शुरू से ही सीए बनना की चाह थी। सीएमएस स्टेशन रोड से इंटर करने के बाद दिल्ली स्थित श्री राम कॉलेज से स्नातक की और साथ में सीए की तैयारी भी शुरू कर दी।
टिप्स: परिश्रम के लिए तैयार रहें। धैर्य भी रखना होगा। सफलता के लिए शॉर्ट कट नहीं है।

 
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उज्जवला - फोटो : अमर उजाला
एक बार लगा था, सीए नहीं बन सकती
तीसरे प्रयास में असफलता हाथ लगी। मैं निराश हो गई और ऐसा लगा कि सीए मेरे बस की बात नहीं है। मेरे पापा व मम्मी को मुझपर भरोसा था। मैंने चौथे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक हासिल कर ली। असफलता के बाद मैंने तैयारी की रणनीति में बदलाव किया। हर विषय पर बराबर फोकस किया। बार-बार रिविजन किया। सिलेबस बड़ा होता है ऐसे में रिविजन भी साथ में जरूरी है। पिता ज्ञानेंद्र कुमार हयारन का प्लाईवुड का व्यापार है, जबकि मां अनुराधा हयारन गृहिणी हैं। मुझे फाइनेंस में दिलचस्पी है और ऑडिट के क्षेत्र में भविष्य बनाना है।
टिप्स: आत्मविश्वास बनाए रखें और मन में कभी यह ख्याल न लाएं कि मैं नहीं कर सकता। हर विषय पर फोकस करें।

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सौम्या गर्ग - फोटो : अमर उजाला
महत्वपूर्ण होता है तैयारी का अंतिम सप्ताह
किसी भी प्रोफेशनल परीक्षा की तैयारी में सप्ताह का अंत बहुत मायने रखता है। मैंने सप्ताह के अंत में सिलेबस को कवर करने की ठानी थी। पूरे हफ्ते तो भी पढ़ाई की सप्ताह के अंत में सभी का रिविजन जरूर किया। यही मंत्र पूरे सीए की तैयारी के दौरान फॉलो किया और पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक हासिल कर ली। आर्टिकलशिप को भी गंभीरता से लिया। यह भी तैयारी में बहुत मदद करता है। कोचिंग, इंस्टीट्यूट और खुद के नोट्स से रेगुलर तैयारी करती रही। पिता अनिल अग्रवाल व्यापारी और मां अंशु अग्रवाल गृहिणी हैं। दिल्ली स्थित श्री राम कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स करने के दौरान ही सीए की तैयारी शुरू कर दी थी। फिलहाल आर्टिकलशिप पर फोकस कर रही हूं, इसके बाद जॉब करूंगी।
टिप्स: सभी विषयों को पढ़ें और समय-समय पर रिविजन भी करते रहें। आर्टिकलशिप को भी गंभीरता से लें।
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हर्षिता मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
पापा होते तो बहुत खुश होते
मुझे सीए करना था, लेकिन पापा स्व. ओम प्रकाश मिश्रा और मां शकुंतला मिश्रा को भरोसा नहीं था। एलपीएस जेल रोड से इंटर करने के बाद लविवि के बीकॉम में दाखिला लिया। दो साल तो मम्मी-पापा को मनाने में लग गया। बीकॉम के द्वितीय वर्ष में सीए की तैयारी शुरू की। बीते वर्ष अप्रैल में पापा की बीमारी से मृत्यु हो गई। आज पापा होते तो खुश होते। मैंने सेल्फ स्टडी और रिविजन पर ज्यादा फोकस किया। मुझे ऑडिट के क्षेत्र में भविष्य संवारना है।
टिप्स : फोकस होकर पढ़ाई करें। जो पढ़ चुके हैं, उसे भी देखते, उसका रिविजन करें। अंत समय तक नया पढ़ने की जरूरत नहीं।
 
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उत्कर्ष भार्गव - फोटो : अमर उजाला
चार्ट की पढ़ाई नहीं चलेगी
मैंने चौथे प्रयास में सफलता हासिल की है। अपनी असफलता के बाद मैंने जाना कि शॉर्टकट की पढ़ाई से काम नहीं चलेगा। कोचिंग में चार्ट के जरिये समझाया जाता है, जबकि कॉन्सेप्ट समझना जरूरी है। मैंने यही किया। पहले दो प्रयास के बाद मैंने अपनी कॉपियां मंगा कर देखीं तो अपनी कमियों को जाना। नकारात्मक सोच लाने के बजाय मैंने फोकस होकर पढ़ाई की। कैथेड्रल से इंटर करने के बाद लविवि से बीकॉम किया और उसी दौरान से सीए की तैयारी शुरू कर दी। पिता मुनीश भार्गव और मां पूनम ने मेरा खूब सपोर्ट किया। मैं प्रैक्टिस करना चाहता हूं।
टिप्स: शॉर्ट कट वाली पढ़ाई न पढ़ें। कॉन्सेप्ट को समझें। नकारात्मक सोच हावी न होने दें।

 
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मीना कनवाल - फोटो : अमर उजाला
शिक्षकों ने कहा था सीए करने को
मैं जब स्कूल में थी तो अकाउंट में दिलचस्पी जाग गई थी। आरएलबी से 92 प्रतिशत के साथ इंटर पास किया। तब शिक्षकों ने कहा कि मुझे सीए करना चाहिए। तभी से मैं सीए की तैयारी में लगन के साथ जुट गई। धैर्य रखते हुए समय प्रबंधन के साथ तैयारी की और दूसरे ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली। मुझे फाइनेंस में दिलचस्पी है। अभी जॉब करनी है, इसके बाद आईआईएम से एमबीए करने की इच्छा है। पिता चंदन सिंह उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम में हैं और मां भगवति कनवाल गृहिणी हैं।
टिप्स: सीए की तैयारी में धैर्य भी रखें। समय प्रबंधन जरूर करें। सभी विषयों पर बराबर फोकस करें। तैयारी के साथ रिविजन को भी प्राथमिकता दें। उसके लिए भी समय निकालें।


 
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