उन्होंने कहा, कोई चूक न हो इसके लिए हनुमान चालीसा की किताब हाथ में ले ली। कार्यक्रम खत्म होने के बाद कई लोगों के फोन आए कि अगर हनुमान चालीसा पढ़ना है तो बगैर देखे पढ़ें। किताब का सहारा न लें। बुक्कल नवाब ने कहा, हनुमान चालीसा मुझे पूरी तरह कंठस्थ है। इसका प्रदर्शन करने के लिए ही पत्रकारों को बुलाया था ताकि लोग जान सके कि मैंने बगैर किताब देखे हनुमान चालीसा का पाठ किया है।