प्राइवेट ट्रेनों को चलाने का रास्ता साफ हो गया है। 150 ट्रेनें निजी ऑपरेटर चलाएंगे। इसमेें से दिल्ली से हावड़ा रूट पर करीब दर्जनभर निजी ट्रेनें लखनऊ के रास्ते होकर गुजरेंगी। वहीं एक ट्रेन लखनऊ से मुम्बई के बीच चलेगी, जोकि तेजस की तरह होगी। इसके लिए निजी ऑपरेटरों को रैक खरीदने पड़ेंगे। मेंटेनेंस चार्ज सहित लोको पायलट, गार्ड जैसे रेलकर्मियों से सेवाएं लेने के लिए रेलवे को भुगतान करना पड़ेगा। इसे लेकर फीजिबिलिटी जांचने का काम शुरू कर दिया गया है। गौरतलब है कि बीते वर्ष चार अक्तूबर को देश की पहली कारपोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस का संचालन शुरू किया गया। आईआरसीटीसी को इसकी कमान सौंपी गई। रेलवे बोर्ड पहले इस ट्रेन को निजी हाथों में सौंपने के मूड में था, लेकिन अनुभव लेने के उद्देश्य से आईआरसीटीसी को संचालन की कमान दी। अब रेलवे बोर्ड ने जिन 150 निजी ट्रेनों को चलाने का खाका तैयार किया है। उन्हें पूरी तरह निजी हाथों में दिया जाएगा। इसके लिए रेलवे बोर्ड से लेकर रेलवे जोनों व मंडलों के स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।