मूल रूप से मऊ के कोपागंज का रहने वाला राकेश पांडेय मुख्तार अंसारी गैंग का शार्प शूटर होने के साथ ही मुख्तार का सबसे भरोसेमंद आदमी भी था। एके 47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों से उसका निशाना अचूक था। राकेश ने 1993 में हत्या की पहली वारदात अंजाम दी थी।
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Rakesh Pandey encounter
- फोटो : अमर उजाला
राकेश 16 साल की उम्र में इंजीनियर बनने का सपना संजोए लखनऊ आया। पॉलीटेक्निक में पढ़ाई पूरी करने के बाद गवर्नमेंट कॉलेज में एडमिशन लिया। उसने लखनऊ में पढ़ाई के दौरान हॉस्टल में अपने ही सहपाठी की हत्या कर दी थी। इसके बाद वह मुख्तार अंसारी के संपर्क में आया। कृष्णानंद राय की हत्या के बाद वह मुख्तार का सबसे खास आदमी बन गया। इसके बाद राकेश ने मुख्तार के साथ मिलकर एक के बाद एक दर्जनों घटनाओं को अंजाम दिया।
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मौके पर पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
400 राउंड से अधिक गोलियां बरसाई थीं
इसके बाद मुहम्मदाबाद के भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या 29 नवंबर 2005 की गई थी। एके-47 से लैस छह बदमाशों ने विधायक के काफिले को घेरकर 400 राउंड से अधिक गोलियां बरसाई थीं। इसमें भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की मौत हो गई थी। पोस्टमॉर्टम में कृष्णानंद राय के शरीर में 21 गोलियां पाई गई थी।
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rakesh pandey encounter
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने विधायक मुख्तार अंसारी तथा उसके भाई सांसद अफजाल अंसारी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इस हत्याकांड में मुख्तार अंसारी, भाई अफजाल अंसारी, संजीव माहेश्वरी, हनुमान पांडेय उर्फ राकेश, एजाजुल हक, रामू मल्लाह और मुन्ना बजरंगी को आरोपी बनाया गया था।
कृष्णानंद राय मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक निर्वाचित थे। सीबीआई ने इस मामले में मुख्तार अंसारी को मुख्य साजिशकर्ता माना था। आपको बता दें कि रविवार को भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोपी मुख्तार अंसारी व मुन्ना बजरंगी का करीबी शूटर राकेश पांडेय एसटीएफ के साथ लखनऊ में हुई मुठभेड़ में मारा गया। एसटीएफ के अनुसार उस पर प्रयागराज पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वहीं, राकेश के पिता का आरोप है कि एसटीएफ ने उसे घर से उठाकर मारा है। राकेश पर दर्ज मुकदमे खत्म हो चुके थे।