लखनऊ के सरोजनीनगर के बंथरा के बनी-मोहान रोड स्थित लतीफनगर तिराहे पर शुक्रवार देर रात करीब ढाई बजे पिकअप और टैंकर की सीधी टक्कर में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, एक ने इलाज के दौरान दम तोड़ा। पांच घायलों का ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। हादसा पिकअप के एक ट्रक को ओवरटेक करते वक्त हुआ। बता दें कि हरदोई के 12 लोग डीजे व लाइट का काम करते थे। सभी मांगलिक कार्यक्रमों में लोगों के घरों को रोशन करने व खुशहाल माहौल बनाने का काम करते थे। लेकिन शुक्रवार रात को एक हादसे ने इन सभी के घरों में मातम का माहौल बना दिया। एक शादी समारोह से वापस जाते समय बनी-मोहान रोड पर टैंकर से पिकअप की टक्कर हो गई। हादसे में तीन गांव के सात लोगों की मौत हो गई। सभी की उम्र 13 से 30 साल के बीच की है।
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हादसे में क्षतिग्रस्त गाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
एक ही गांव दलेलपुर के चार लड़कों की मौत की सूचना से पूरा गांव सन्नाटे में हैं। वहीं जैसे पोस्टमार्टम के बाद शव पहुंचा तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। हरतरफ चीखपुकार मच गई थी।
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Road accident in lucknow
- फोटो : अमर उजाला
अंतिम संस्कार के नहीं है रुपये
हादसे में दलेलपुर के रहने वाले बुधई के दो बेटे जयकरण व स्वयंभर शिकार हो गये। दोनों की मौत हो गई। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे बुधई ने बताया कि पांच बेटे थे। सभी मिलकर मजदूरी कर घर का खर्च चलात थे। पांचों के जयकरण, स्वयंभर, मोहन, राजेंद्र व छोटू शामिल है।
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Road accident in lucknow
- फोटो : अमर उजाला
बुधई ने बताया कि उसके पास गांव जाने के लिए रुपये तक नहीं है। गाड़ी वाले ने प्रति शव 2500 रुपये मांगे। जब कुछ समझ में नहीं आया तो तीन परिवार मिलकर एक बस किया। जिससे चार शव लेकर दलेलपुर गये। पिता ने बताया कि अंतिम संस्कार के लिए भी रुपये नहीं है। किसी से कर्ज लेकर करेंगे और फिर अनाज बेचकर वापस करेंगे।
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मृतक शैलेंद्र का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
कुछ दिन पहले गूंजी थी किलकारी
हादसे में मृतक के घर में हाल ही कुछ दिन पहले बेटी हुई थी। घर में उसकी किलकारी गूंजी, लेकिन शैलेंद्र उसे सही सुन भी न सका। शैलेंद्र के पिता संतराम के मुताबिक परिवार में पत्नी फूलन, बेटी उपासना और एक दूधमुंही बच्ची है। खेती भी नाम भर की है।
वहीं राम आधार के पिता परशु के मुताबिक उनका बेटा नवीं का छात्र था। दो और बेटे जो सहयोग करते हैं। कुछ दिन पहले ही उसने काम शुरू किया था। पिता परशु के मुताबिक उनको नहीं मालूम था कि चंद रूपये की जुगत में लगा राम आधार हमसे इतना दूर चला जाएगा। मां प्रेमा देवी की हालत काफी खराब है।