परिवहन निगम के अवध डिपो की जनरथ बस के आठ जुलाई को तड़के आगरा-यमुना एक्सप्रेस वे स्थित नाले में गिरने की उच्चस्तरीय जांच पर हादसे में घायल यात्री गौरव सिंह ने सवाल उठाया है। सोमवार को गौरव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि उच्चस्तरीय समिति ने परिवहन निगम के अफसरों को बचाने के लिए मृतक चालक को 29 यात्रियों की मौत एवं 22 के घायल होने का जिम्मेदार ठहरा दिया। लेकिन हादसे के लिए जनरथ बस का खराब व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और अनजान रूट पर चालक की ड्यूटी लगाने वाले अफसर जिम्मेदार हैं।
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शवों को निकालती पुलिस और अन्य
- फोटो : अमर उजाला
गौरव ने बताया कि उसने 100 नंबर पर लगातार फोन किया, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया। इससे मृतकों की तादाद बढ़ी। समय से उपचार मिल जाता तो कुछ यात्रियों की जान बच सकती थी। चालक गाजीपुर रूट का जानकार था, जिसको अफसरों ने मनमाने तरीके से वहां से हटाकर उसे अनजान दिल्ली रूट पर भेजा था।
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शवों को निकालती पुलिस और अन्य
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उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि हादसे की गलत रिपोर्ट देने वाले अफसरों और मृतक चालक की ड्यूटी लगाने वाले स्टेशन इंचार्ज एवं सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने दूसरी कमेटी से हादसे की जांच कराने की मांग की है। गौरव ने कहा मृतकों के परिजनों को पांच लाख के बजाय 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और इसकी भरपाई परिवहन निगम के लापरवाह अफसरों से हो।
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खाई में गिरी बस
- फोटो : अमर उजाला
जांच जारी, रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
परिवहन निगम के नवनियुक्त प्रबंध निदेशक राजशेखर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि इस प्रकरण की उनके स्तर से कोई जांच नहीं कराई जाएगी। हादसे की उच्च स्तरीय समिति की जांच जारी है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
बस को जेसीबी मशीन से नाले से बाहर निकाला गया
- फोटो : अमर उजाला
आपको बता दें कि आठ जुलाई सोमवार सुबह आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र में लखनऊ से दिल्ली जा रही एसी बस यमुना एक्सप्रेस वे की रेलिंग तोड़ते हुए 60 नीचे झरना नाले में जा गिरी थी। हादसे में 29 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग गंभीर घायल थे। बस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया था।