सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश यादव को पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव की गैर-मौजूदगी में पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया। इसके बाद से यह तय हो गया कि अब अखिलेश ही पार्टी के सर्वेसर्वा होंगे। हालांकि, पहले कयास लगाए जा रहे थे कि मुलायम राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल हो सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पढ़ें, आगरा अधिवेशन से जुड़ी खास बातें
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अखिलेश यादव को अगले पांच साल के लिए पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। जबकि इसके पहले अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्षों का होता था। इसके लिए पार्टी के संविधान में संशोधन किया गया। जिसके प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
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अखिलेश यादव के अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया में महासचिव राम गोपाल यादव को निर्वाचन अधिकारी बनाया गया। रामगोपाल ने ही एक जनवरी को भी अखिलेश को अध्यक्ष बनाने की घोषणा की थी। मुलायम सिंह यादव को पद से हटाकर अखिलेश को अध्यक्ष बनाया गया था।
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अभी तक शिवपाल यह कहते रहे हैं कि वह मुलायम के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से भी कई बार कहा कि अगर अखिलेश नेताजी को अध्यक्ष का पद सौंप देते हैं तो सारी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।
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बताया जा रहा है कि मुलायम के साथ ही शिवपाल ने भी अधिवेशन में भाग लेने पर चर्चा की थी लेकिन अंतिम समय में अपना फैसला बदल लिया।