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मटर की चाट, सिगरेट के कश के साथ जोरदार ठहाके, दुश्मनी भी खुली रही तो दोस्ती भी गाढ़ी, हमेशा याद आएंगे बेनी बाबू

Sat, 28 Mar 2020 10:33 AM IST
शाहरुख खान अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
मटर की चाट, पकौड़ी की किस्मों पर बात, सिगरेट के साथ जोरदार ठहाके। दो टूक अंदाज, किसी को बुरा लगे या भला। जो तय कर लिया तो कोई डिगा नहीं पाया। बड़े कद के नेता लेकिन बात-व्यवहार से आम आदमी। जो न पहचाने तो उसके लिए पूरी तरह गंवई नेता। पर, बात यदि अंग्रेजी में जवाब देने की भी आ गई तो भी पीछे नहीं। 
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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
बाजार में निकले तो कहीं भी गाड़ी रुकवा ली और शुरू हो गई पंचायत। किसी से ठन गई तो जमकर दुश्मनी और साथ हुए तो दोस्ती भी ऐसी कि लोग मिसाल दें। लोगों में बेनी बाबू नाम से पहचाने जाने वाले राज्यसभा के सदस्य व पूर्व मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की यही पहचान थी।
 
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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
बेनी बाबू को देखने वालों में यदि कोई अंजान हो तो उसके लिए यह अंदाज लगाना ही मुश्किल कि उनके सामने इतने बड़े कद का नेता है जो न सिर्फ  सड़कों पर संघर्ष करने वाला रहा है बल्कि राज्य से लेकर केंद्र तक की सरकार तक में जिम्मेदार विभागों की बतौर मंत्री जिम्मेदारी संभाल चुका है। बाराबंकी और वहां के लोगों में बेनी बाबू की जान बसती थी। 
 

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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ में मंत्री रहे या दिल्ली में, उन्हें जैसे ही मौका मिला तो बाराबंकी का रुख कर लिया। अस्वस्थ होने के पहले तो वह कहा ही यही करते थे, ‘बाराबंकी के अलावा दूसरी जगह चैन की नींद ही नहीं आती।’ बाराबंकी वालों के लिए वह विकास पुरुष थे। होते भी क्यों ने आखिर उन्हीं के प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री बनने के बाद बाराबंकी में सड़कों की तस्वीर जो बदली।
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ताश के पत्तों से लेकर क्रिकेट तक की बात

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बेनी प्रसाद वर्मा - फोटो : amar ujala
बड़ा कद होने के बावजूद कुछ राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्हें बतौर मुख्यमंत्री प्रदेश का नेतृत्व करने का मौका नहीं मिला। हालांकि चर्चा कई बार चली। बेनी बाबू से जो मिलने पहुंचता तो वह उसे मटर की चाट व पकौड़ी खिलाना नहीं भूलते। कोई बाराबंकी का पहुंच गया तो फिर शुरू कर देते बाराबंकी में हरख से लेकर कुर्सी तक खाने-पीने की वस्तुओं का बखान।
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बेनी प्रसाद वर्मा(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
हाथ की बीच की दो अंगुलियों में दबी सिगरेट के कश और गुल्ली-डंडा से लेकर ताश के पत्तों के खेल की बारीकी लेकिन किसी ने चर्चा क्र्तिकेट की छेड़  दी तो भी पीछे नहीं। सिगरेट जैसे उनकी सहयात्री थी। चिकित्सकों ने कई बार उन्हें सिगरेट छोड़ने का कहा लेकिन वह कहते, ‘इसे न मैं छोड़ पाऊंगा और न ये मुझे।’  मुलायम की सैफई की तरह अपने क्षेत्र सिरौली गौसपुर को प्रदेश के नक्शे पर लाने की फिक्र्त करने वाले बेनी बाबू को भुला पाना उन लोगों के लिए काफी मुश्किल रहेगा जो उनसे कभी न कभी मिले हैं।
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