डॉ. राममनोहर लोहिया, रामसेवक यादव और चौधरी चरण सिंह के बाद दूसरी पंक्ति के समाजवादी नेताओं में बेनी बाबू प्रमुख नाम रहे। लोग उन्हें समाजवादी पार्टी में मुलायम के लक्ष्मण के रूप में ही नहीं पहचानते थे बल्कि उनके समाजवादी पार्टी छोड़ने से पहले तक जब भी मुलायम सरकार बनी तो उनका कद मिनी मुख्यमंत्री जैसा ही रहा। यहां तक कि मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव का नंबर भी बेनी बाबू के बाद आता था।
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अमर सिंह व बेनी प्रसाद वर्मा
- फोटो : amar ujala
माना तो यह भी जाता है कि मुलायम को प्रदेश में पिछड़ों का नेता स्थापित करने में भी बेनी बाबू का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रदेश में पिछड़ी जातियों में यादवों के बाद दूसरे नंबर पर आने वाली कुर्मियों में बेनी बाबू की अच्छी पकड़ इसकी बड़ी वजह रही। लोकप्रिय लेकिन जिद्दी इतने कि अमर सिंह के मुद्दे पर मुलायम से भी दो-दो हाथ पर उतर आए।
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बेनी प्रसाद वर्मा
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पहले सपा से अलग होकर उन्होंने पार्टी बनाई और फिर उस कांग्रेस में शामिल हो गए, जिसके खिलाफ ही उन्होंने राजनीति का ककहरा पढ़ा था। समय-समय पर कई बार उनके भाजपा में भी जाने की चर्चा फैली। पर, अंतिम दिनों में वह कांग्रेस से फिर सपा में ही लौट आए।
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सभा को संबोधित करते बेनी प्रसाद वर्मा।
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धोती-कुर्ता से लेकर सूट-टाई बाबू तक
बेनी बाबू काफी दिलचस्प व्यक्तित्व के थे। आमतौर पर धोती-कुर्ता में देखे जाने वाले बेनी बाबू कांग्रेस सरकार में जब पहली बार सूट व टाई में लोगों को दिखे तो सभी चौंक गए। पर, दिलचस्प और हंसी-ठिठोली करने वाले बेनी बाबू से जब ‘अमर उजाला’ ने एक बार इस बारे में पूछा तो उन्होंने दिलचस्प तरीके से कहा, कांग्रेस में हूं भाई। कांग्रेस में रहे तो भी उन्होंने अपना स्वभाव नहीं बदला।
बेनी प्रसाद वर्मा व मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
सपा के सहयोग से प्रमोद तिवारी ने जब राज्यसभा का पर्चा भरा तो वह बेनी बाबू ही थे जिन्होंने खुलकर इसकी आलोचना की। लोग उनसे बयान बदलने को कहते रहे लेकिन उन्होंने कहा, ‘जो कह दिया वह कह दिया।’ बेनी बाबू जितना अपनों के बीच लोकप्रिय थे उससे कम विरोधियों के बीच भी नहीं थे।