राम मंदिर के दान में डाका डलता रहा और पुलिस को इसकी भनक तक न लगी। नकदी और जेवरात पार होने के मामले में पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर पुलिस ने क्या निगरानी की?
राम मंदिर से चढ़ावा चोरी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर परिसर से लेकर आसपास का इलाका सीसीटीवी कैमरों की जद में है। इसके लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां से निगरानी की व्यवस्था है। पुलिस को भी इसका एक्सेस है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रहे। लेकिन मामले में गणना कर्मी व अन्य लोग चढ़ावा पार करते रहे और पुलिस को भी इसकी भनक तक नहीं लगी। इसलिए पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राम मंदिर व आसपास का इलाका संवेदनशील है। चप्पा-चप्पा कैमरों की जद में है। हर एंट्री प्वाइंट पर कड़ा पहरा है। बिना जांच कोई भी व्यक्ति मंदिर परिसर में नहीं जा सकता। वहां किसी तरह की गड़बड़ी करना भी आसान नहीं माना जाता।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कैमरों के जरिए पुलिस लगातार निगरानी करती है, मगर करोड़ों रुपये का चढ़ावा आरोपी उन्हीं कैमरों को धता बताते हुए पार कर ले गए। यही नहीं, वे मंदिर परिसर के बाहर भी निकल गए, लेकिन पुलिस को इसकी जानकारी नहीं लगी। क्योंकि यदि पुलिस को इसकी भनक लगती तो आरोपियों को उसी समय पकड़ लिया जाता।
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ये भी रही बड़ी वजह
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मंदिर की सुरक्षा प्राथमिकता रहती है। किसी को अंदाजा नहीं था कि भीतर से ही कोई कर्मी इस तरह का हेरफेर करेगा। इसलिए उस व्यवस्था की निगरानी उतनी गहनता से नहीं की जाती थी। परिसर के भीतर और बाहर सुरक्षा को लेकर ज्यादा सक्रियता रहती थी। कैमरों का एक्सेस ट्रस्ट के पास भी है, जबकि गणना प्रक्रिया में पुलिस की कोई भूमिका नहीं रहती थी। इसी वजह से पुलिस का ध्यान इस ओर नहीं गया। हालांकि कहीं न कहीं चूक जरूर हुई है।
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अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
मंदिर की सुरक्षा के लिए पूरी सक्रियता बरती जाती है। कैमरों का एक्सेस पुलिस के पास है, जिससे निगरानी की जाती है। इसके लिए 24 घंटे पुलिस टीम तैनात रहती है। - बलरामाचारी दुबे, एएसपी सुरक्षा, राम मंदिर
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राम मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बड़े लोगों के करीबी हैं कर्मी, इसलिए भी पुलिस ने शक नहीं किया
मंदिर परिसर में कार्यरत कई कर्मचारी पदाधिकारियों के रिश्तेदार, परिचित या उनके परिचितों के परिचित बताए जाते हैं। जिसे मौका मिला, उसने अपने लोगों की भर्ती करवा दी। मंदिर परिसर का कर्मचारी होने के कारण पुलिसकर्मी भी उन्हें आने-जाने से नहीं रोकते थे। यह भी माना जाता था कि ये सभी किसी न किसी पदाधिकारी से जुड़े हुए हैं।
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केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
अखिलेश व उनका परिवार रामद्रोही
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनका कुनबा रामद्रोही है। वह राम जन्मभूमि के पवित्र विषय पर टिप्पणी न करें। उन्हें ऐसी बातें करना शोभा नहीं देंतीं।-केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री (प्रयागराज में)
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अखिलेश यादव, अध्यक्ष समाजवादी पार्टी।
- फोटो : अमर उजाला।
एसआईटी रिपोर्ट न हो जाए चोरी
एसआईटी ध्यान रखे कि कहीं उसकी जांच रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए। फिर कहेंगे 15 दिन और इंतजार कर लो। दिन इसलिए बढ़ा रहे हैं, क्योंकि सबूत ठिकाने लगा रहे हैं। लोगों का गुप्त दान गायब निकला। अखिलेश यादव,सपा अध्यक्ष (कन्नौज में)
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सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर
- फोटो : अमर उजाला
पाई-पाई का होगा हिसाब
दान की पाई-पाई का हिसाब लिया जाएगा। जांच में दोषी मिलने पर कार्रवाई होगी। बैंक और गणना कर्मियों को गड़बड़ी का अवसर मिला। - जेपीएस राठौर, सहकारिता मंत्री
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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय
- फोटो : ANI
जांच रिपोर्ट हो सार्वजनिक
चंदा चोरी से लोगों की आस्था पर चोट पहुंची है। एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करें ताकि सबको पता चले कि आरोपी कौन है। अयोध्या और वाराणसी कॉरीडोर में बनीं दुकानों की भी जांच कराई जाए। अजय राय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
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राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आप ने भिक्षाटन कर चंपत राय को भेजा 420 रुपये का चेक
राम मंदिर के चढ़ावे में हेरफेर व जमीन खरीद में अनियमितता का आरोप लगाकर आम आदमी पार्टी ने रविवार को राजधानी समेत प्रदेशभर में भिक्षाटन किया। यूपी प्रभारी व सांसद संजय सिंह के आह्वान पर कार्यकर्ताओं ने कटोरे तख्तियां लेकर नारेबाजी की और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को 420 रुपये का चेक भेजकर विरोध दर्ज कराया।
ऑटो विंग के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह सलूजा ने कहा महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा था और आज भाजपा-आरएसएस के लोग राम मंदिर को लूट रहे हैं। जिला महासचिव ज्ञान सिंह कुशवाहा ने जमीन खरीद के दस्तावेजों का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध जांच कराने और चंपत राय को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की।