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राम मंदिर चंदा गबन: चोरी से लेकर लापरवाही, केंद्र सरकार ने किया था ट्रस्ट का गठन, PMO भी भेजी गोपनीय रिपोर्ट

Mon, 22 Jun 2026 08:43 AM IST
Sharukh Khan सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ

सार

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण में अब कार्रवाई को लेकर लखनऊ से दिल्ली तक मंथन जारी है। एसआईटी की जांच में ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारियों तक जांच की आंच पहुंची है। वहीं दूसरी तरफ आपराधिक कृत्य में गणनाकर्मी समेत करीब तीस लोगों की भूमिका सामने आई है। किस पर क्या और किस तरह की कार्रवाई की जानी है, अब इसको लेकर चर्चा जारी है। इसमें पीएमओ के निर्देशों का इंतजार है
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Ayodhya Ram Mandir Donation - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा राशि से जुड़े गबन और अनियमितताओं के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है। इस जांच की रिपोर्ट अब शासन को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। सूत्रों के अनुसार, इस प्रकरण में राम मंदिर ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिससे जांच की आंच लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पहुंच गई है।



एसआईटी की जांच में न केवल गणनाकर्मी बल्कि ट्रस्ट के करीब तीस लोगों की संलिप्तता सामने आई है। प्रारंभिक पूछताछ में कई सवालों के संतोषजनक जवाब न मिलने और गोलमाल जवाब देने के कारण टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प जैसे व्यक्तियों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। इन लोगों के यहां से नकदी बरामद होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। एसआईटी ने इन पांचों से करीब 20 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की है।
 
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राम मंदिर में प्रवेश करती एसआईटी की टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मामले में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी चल रही है। सूत्रों का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर चंपत राय के करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प सहित पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की प्रबल संभावना है। हालांकि, अंतिम निर्णय एसआईटी की रिपोर्ट और शासन स्तर पर समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा। इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देशों का भी इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था। पीएमओ से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई और ट्रस्ट के पुनर्गठन पर निर्णय लिया जाएगा।
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जांच के लिए पहुंची एसआईटी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
संभावित कार्रवाई 
सूत्रों के अनुसार, एक-दो दिन के भीतर कार्रवाई शुरू हो सकती है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। यह पूरा घटनाक्रम राम मंदिर जैसे संवेदनशील मामले से जुड़ा होने के कारण, इसमें अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है और लखनऊ से दिल्ली तक उच्च स्तर पर मंथन जारी है।

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मंदिर परिसर में पहुंची एसआईटी की टीम। - फोटो : अमर उजाला।
एक गोपनीय रिपोर्ट पीएमओ भी भेजी गई
जब से मामले ने तूल पकड़ा है, तब से पीएमओ की नजर इस पर बनी हुई है। यहां तक कि पीएमओ के कई अधिकारी खुद मंदिर पहुंचकर छानबीन कर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक इन अफसरों ने भी एक गोपनीय जांच रिपोर्ट तैयार की है, जिसे पीएमओ भेजा गया है। इसमें भी हेरफेर से लेकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की लापरवाही व कुछ की भूमिका संदिग्ध होने की बात कही गई है। यही वजह है कि मामले में बड़ी कार्रवाई भी संभव है।


 
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अयोध्या का राम मंदिर। - फोटो : amar ujala
बयानों के सापेक्ष मिले सुबूत
एसआईटी और पीएमओ की टीम ने कई लोगों के बयान लिए। ये वो लोग थे जो ट्रस्ट पदाधिकारियों पर आरोप लगा रहे थे। बयानों को टीमों ने अहम माना। जांच में कई सुबूत भी मिले। इसलिए मामला गंभीर है। विस्तृत जांच में हेरफेर की और परतें खुलेंगी।
 
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रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
टिन्नू समेत कई पर जल्द कसेगा शिकंजा
टिन्नू की भूमिका पर सबसे अधिक सवाल उठे हैं। वह चंपत राय का ड्राइवर रहा है और वर्तमान में उसका हस्तक्षेप हर काम में था। सूत्रों के मुताबिक जिस एफआईआर की तैयारी है, उसमें टिन्नू प्रमुख आरोपी हो सकता है। उसके साथ गणनाकर्मी शामिल रहेंगे। वहीं अज्ञात में कई आरोपी बनाए जा सकते हैं। विवेचना में बड़े नाम जोड़े जाएंगे। विवेचना भी आईपीएस की निगरानी में गठित टीम से कराने पर विचार चल रहा है।
 
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राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
चोरी से लेकर लापरवाही के साक्ष्य
एसआईटी रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी को लेकर तमाम साक्ष्य जुटाए गए हैं। गवाहों के बयान भी अहम हैं। सूत्रों के मुताबिक कई पदाधिकारियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई गई है। इसके अलावा पूरी व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों की भूमिका विस्तृत रूप से दर्ज की गई है। एसआईटी रिपोर्ट को लेकर सीएम को ब्रीफ करेगी। उसके बाद जो निर्देश मिलेंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू होगी। चोरी में संलिप्त लोगों पर एफआईआर की संस्तुति एसआईटी ने की है।

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राम मंदिर
नियम-कायदे रख दिए ताक पर, होगी मुसीबत
मंदिर प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त थी। जिम्मेदार बेखबर रहे और खेल होता रहा। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने इसका अपनी रिपोर्ट में प्रमुखता से जिक्र किया है। जो गाइडलाइन थी, उसका पालन ही नहीं किया गया। यह लापरवाही ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के लिए मुसीबत बन सकती है।

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राम मंदिर
40 गणनाकर्मी हटे, नए लगाए गए
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में गणना में लगे करीब 40 कर्मचारियों को आखिरकार हटा दिया गया है। अब बैंक की ओर से नए गणनाकर्मियों को लगाया गया है। निगरानी भी बढ़ा दी गई है। एसआईटी ने मंदिर ट्रस्ट और मंदिर के अधिकारियों को अयोध्या नहीं छोड़ने का निर्देश भी दिया है। वहीं, छह दिन की जांच के बाद लखनऊ लौटी एसआईटी सोमवार को डेढ़ सौ से अधिक पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है। इसके बाद मामले में कार्रवाई शुरू होगी।

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अयोध्या के राम मंदिर की तस्वीर - फोटो : ANI Photos
इससे पहले कयास लगाए जाते रहे कि रविवार को ही रिपोर्ट सीएम को सौंप दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। एसआईटी के मुख्य सदस्यों के लौटने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए कुछ अधिकारियों के अयोध्या में ही तफ्तीश में जुटे रहने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी जल्द फिर अयोध्या जा सकती है। विस्तृत जांच के लिए उसे दो से तीन सप्ताह का और वक्त दिया जा सकता है।


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राम मंदिर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसआईटी की जांच में पता चला था कि चढ़ावे की गणना में करीब 40 लोगों की टीम शामिल रहती है। इसमें ट्रस्ट और बैंक, दोनों के कर्मचारी होते हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारी भी पूरी प्रक्रिया में मौजूद रहते हैं। गणनाकर्मियों की भूमिका सामने आने के बाद इस काम में लगे सभी कर्मियों को हटा दिया गया है। नए सिरे से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। अब ट्रस्ट के पदाधिकारी अपनी मौजूदगी में दान राशि की गणना करवा रहे हैं। बैंक अधिकारियों की भी मौजूदगी सुनिश्चित की गई है। 
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राम मंदिर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अपराधी को मिले कड़ी सजा : विहिप
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के चढ़ावे के गबन मामले की गहन जांच की मांग की है। संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि जिसने भी अपराध किया है, उसे कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। साथ ही, यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट आने से पहले सभी की छवि खराब करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। मीडिया से बात करते हुए आलोक कुमार ने इस पर संतोष जताया कि आरोप लगने के तुरंत बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अपील पर उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि मामले की पूरी और गहराई से जांच हो न कि किसी के प्रति सहानुभूति के आधार पर हो।
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