अयोध्या मुद्दा अदालत में हैं और इसकी सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी की तारीख तय की है। जिसमें सुनवाई के बाद कोर्ट मामले पर अपना निर्णय सुनाएगी, लेकिन राम की नगरी सियासत और अदालत की कार्रवाई से दूर अपनी ही रौ में बह रही है।
यहां पर सुरक्षा का कड़ा पहरा है इसके बावजूद स्थानीय लोग अपने जीवन की भागदौड़ में मशगूल हैं। पर्यटक आ रहे हैं। बाबरी विध्वंस के 26वें साल में राम नगरी बदली-बदली सी है। सरयू के घाटों पर रौनक है। आम लोग, बाहरी श्रद्धालु बेरोकटोक आ-जा रहे हैं।
सियासी हलचल की सुर्खियां बनने वाली अयोध्या में जोश-आवेश और विद्वेष के बजाय अब तरक्की और रोजगार की कसक है। ये तस्वीरें पांच दिसंबर और छह दिसंबर की हैं। आगे देखें-
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अयोध्या
- फोटो : amar ujala
ये नजारा छह दिसंबर की सुबह सरयू के तट का है।
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सुरक्षा-व्यवस्था के मद्देनजर आरएएफ के जवान पूरे दिन नगर में मार्च करते रहे।
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अयोध्या
- फोटो : amar ujala
सरयू में नौकाविहार करने पर्यटक आए। बिना किसी भय और हंगामे के लोग पूरे नगर में घूमते रहे।
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राम की पैढ़ी पर माला जपता एक साधु।
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अयोध्या
- फोटो : amar ujala
यौम ए गम मनाने के लिए मस्जिद पर प्रतीकात्मक तौर पर एक काला झंडा लगा दिया गया।
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कहीं कोई हंमागा नहीं। सब कुछ सामान्य। (हनुमानगढ़ी के निकट मुख्यमार्ग पर रूट मार्च करते पुलिस के जवान।)
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तुलसी उद्यान के सामने चहलकदमी करते श्रद्घालु।
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ये तस्वीर कल यानी 5 दिसंबर की है। अयोध्या मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी घर में कुछ मुस्लिम युवकों के साथ टीवी पर नजर गड़ाए मिले। वहां मौजूद मोहम्मद अनीस कहते हैं कि मंदिर-मस्जिद की बात अब नहीं होनी चाहिए। युवाओं को रोजगार कैसे मिले, इस पर कौन सोच रहा है। मो. कादिर भी अनीस से सहमति जताते हैं। मोहम्मद सद्दाम कहते हैं कि विवाद ने अयोध्या को बहुत ही पीछे ढकेल दिया है। अब अयोध्या के विकास का रास्ता खुले। यहां शांति हो।