16 मई से चल रहे अधिकमास के चलते थमी वैवाहिक लग्न और बैंड, बाजा और बारात का दौर एक बार फिर से शुरू होने जा रहा है।
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13 जून को खत्म हुए अधिक ज्येष्ठ मास के बाद अब रुकी हुई सहालग का दौर 18 जून से शुरू हो जाएगा।
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गली-मोहल्लों में शहनाइयां गूंज उठेंगी। इसी के साथ अब आने वाले दिनों में तीज-त्यौहारों की सतरंगी छटा बिखरेगी।
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मांगलिक कार्यों के साथ सहालग का दौर 18 जून से शुरू हो जाएगा। यह सिलसिला 16 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान करीब 15 श्रेष्ठ लग्न मिलेंगी। आचार्य प्रदीप ने बताया कि एक महीने तक मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त मिलेंगे।
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इसके बाद हरिशयनी एकादशी के बाद सहालग थमेगी। जुलाई के बाद जाड़ों में सहालग का टोटा रहेगा। दिसंबर में एक-दो लग्न के अलावा पूरा साल सूना ही रहेगा।
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23 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी व चातुर्मास के कारण लग्न कम पड़ेंगी। देवता 19 नवंबर तक शयन करेंगे। इन चार महीनों में विवाह नहीं होंगे। इस बीच 13-14 नवंबर से 8 दिसंबर तक गुरु भी अस्त रहेंगे, जिसके चलते भी विवाह आदि शुभ कार्य नहीं हो पाएंगे।
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इसके बाद 16 दिसंबर से खरमास शुरू हो जाएगा तो लग्न न होने के चलते विवाह नहीं हो सकेंगे। गुरु उदय होने और खरमास शुरू होने के दौरान गिनी-चुनी लग्न ही मिलेंगी। 18 जून, 2018 को तारीख का संयोग होने से बंपर शादियां होगी। कस्बाई इलाकों के अलावा, शहरों में शादियां खूब होने को लेकर जबरदस्त बुकिंग रहेगी।