यशोदा नंदन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इस बार भी साधु संत और गृहस्थों के लिए अलग-अलग पूजन-व्रत के साथ आया है।
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दो सितंबर की शाम से अष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र मिलने के संयोग के बीच ज्योतिषियों ने गृहस्थों को दो सितंबर को और सन्यासी जनों को तीन सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखना श्रेयस्कर माना है।
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गोमतीनगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बृहस्पतिवार को बताया कि दो सितंबर को शाम 5:09 बजे से अष्टमी का मान शुरू हो जाएगा, जो कि तीन सितंबर को दोपहर बाद तक रहेगा। दो सितंबर को ही शाम 6:30 से रोहिणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा।
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चूंकि दो सितंबर को ही अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि का जयंती संयोग रहेगा, इसलिए गृहस्थों को श्रीकृष्णजन्माष्टमी व्रत-पूजन करना उसी दिन ठीक रहेगा।
जबकि तीन सितंबर को अष्टमी उदया तिथि में तो मिलेगी, लेकिन मध्यरात्रि के समय अष्टमी नहीं रहेगी। इसलिए वैष्णवजन सन्यासीजन को उसी दिन व्रत रहना ठीक रहेगा। उन्होंने बताया कि अरसे बाद ऐसा जयंती संयोग मिल रहा हे।