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प्रवासी भारतीय दिवस पर वेबिनार, विशेषज्ञ बोले- आत्मनिर्भरता के लिए ब्रांड इंडिया का निर्माण जरूरी

Sat, 09 Jan 2021 08:57 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
अब वक्त आगे बढ़कर देखने का है। भारत का लोहा तो दुनिया पहले से ही मानती है, अब आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने का वक्त है। कोरोना काल में नए इरादों, नई क्षमताओं के साथ खुद की पहचान बनाने वाले आत्मनिर्भर युवा दुनिया के लिए ब्रांड बन चुके हैं, बस इस संकल्प को सींचना होगा और जड़ों से जुड़े रहकर हर भारतीय को आगे बढ़ना होगा। यह निष्कर्ष रहा शनिवार को प्रवासी भारतीय दिवस पर अमर उजाला द्वारा आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों से संवाद का। देश-दुनिया में अपनी चमक बिखेर रहे लखनवी और सामाजिक मोर्चे पर योगदान दे रही शख्सियतें इस वेबिनार का हिस्सा रहीं। जानिए क्या कहा उन्होंने।
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प्रो. मनोज कुमार अग्रवाल, प्रमुख, अर्थशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय - फोटो : amar ujala
अपनी जड़ों में ही देखना होगा
लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रो. मनोज कुमार अग्रवाल का कहना है कि प्रवासी भारतीय भारतीयता की जड़ों को सींचने का काम करते हैं। दुनिया में शायद ही ऐसा कोई देश हो जहां भारतीय न हों। कोरोना काल ने भारत को नए रूप में ढालने का मौका दिया है। कोरोना ने सिखाया है कि हमें अपनी जड़ों की ओर ही देखना होगा। भारतीयता को सींचना होगा। यह काम प्रवासी भारतीयों से बेहतर कोई दूसरा नहीं कर सकता है।
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डॉ. फराह उस्मानी, निदेशक, यूएनपीएफ - फोटो : amar ujala
ब्रांड इंडिया का निर्माण जरूरी
यूएनपीएफ की निदेशक डॉ. फराह उस्मानी का कहना है कि त्रिस्तरीय संरचना पर कार्य करने की आवश्यकता है। हमें राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ब्रांड इंडिया को प्रमोट करने पर ध्यान देना होगा। हमें अपने देश के अच्छे तौर तरीकों, तकनीक को शेयर करना होगा। अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व को भारतीयता के गौरव से पुन: रूबरू कराना होगा। भारत की वैश्विक छवि में सुधार हुआ है। अब ब्रांड इंडिया को प्रमोट करना होगा।

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राहुल दत्त अवस्थी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन लीडर, शिकागो - फोटो : amar ujala
दृष्टिकोण पर काम करना आवश्यक
शिकागो में रहने वाले डिजिटल ट्रांसफार्मेशन लीडर राहुल दत्त अवस्थी का कहना है कि दृष्टिकोण पर काम करना बेहद जरूरी है। अगर हमें 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है तो शोध के दृष्टिकोण को बदलना होगा। हमें डिजिटल रूप में अपनी भाषा को बढ़ावा देना ही होगा। जिस दिन हमारी भाषा में कोडिंग होने लगेगी, एक बड़ा डिजिटल ट्रांसफार्मेशन होगा। भारत भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में अग्रणी देश बन जाएगा और सभी के लिए इस डिजिटल ट्रांसफार्मेशन का हिस्सा बनना आसान हो जाएगा। प्रवासी भारतीय होन के नाते डिजिटल ट्रांसफार्मेशन के लिए इंडियन भाषा में कोडिंग को बढ़ावा देने से भारत के प्रति विश्व के दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव लाएगा।
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जयंती रामानन, इंटरनेशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर, सेवा - फोटो : amar ujala
क्षमता और हुनर निखारने पर हो काम
सेवा की इंटरनेशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर, जयंती रामानन का कहना है कि आज युवाओं खासकर लड़कियों की क्षमता निर्माण व हुनर निखारने पर काम करना बेहद जरूरी है। कोरोना काल ने हमें इसकी जरूरत बताई है। कोरोना संकट काल में जब लड़कियों ने सरकारी स्कूलों में जाना बंद कर दिया तो उन्हें सैनिटरी पैड की उपलब्धता नहीं हो पा रही थी, जिस पर काम करते हुए गांवों में पुन:  सैनिटरी पैड बनाने के छोटे-छोटे केंद्रों की स्थापना करवाई। इसी तरह महिलाओं, बालिकाओं की क्षमता निर्माण के प्रयास विदेशों में भारत की आत्मनिर्भरता को एक ब्रांड बनाएंगे।
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ग्लोबल विलेज को लेकर आगे बढ़ना होगा

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सलीम आरिफ, वरिष्ठ रंगकर्मी, लेखक, निर्देशक - फोटो : amar ujala
वरिष्ठ रंगकर्मी, लेखक, निर्देशक सलीम आरिफ का कहना है कि रंगमंच की नई पीढ़ी भारत और विश्व के बीच महत्वपूर्ण सेतु का काम करेगी। भारत को जब सॉफ्ट पॉवर के रूप में देखते हैं तो प्रवासी भारतीय इसकी एक अहम कड़ी के रूप में सामने आते हैं। ग्लोबल विलेज की अवधारणा को ही आगे बढ़ाना होगा। रंगमंच की बात करें तो डिजिटल ओटीटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से विदेशों में भारतीय कला के बेहतर कंटेंट को परोसना अब अधिक आसान हो गया है। हालांकि कंटेट पर काफी ध्यान भी देना होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारतीय कलाओं को वैश्विक पहचान दिलाना अब अधिक आसान हो गया है।
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अब्बास सैय्यद मोहम्मद, सीनियर डायरेक्टर, आइकॉन क्लीनिकल रिसर्च - फोटो : amar ujala
क्लीनिकल रिसर्च में रोजगार की संभावनाएं
आइकॉन क्लीनिकल रिसर्च में सीनियर डायरेक्टर अब्बास सैय्यद मोहम्मद का कहना है कि कोरोना ने भारत में क्लीनिकल ट्रायल के बाजार से लेकर चिकित्सकीय उत्पादों के निर्माण में रोज़गार की संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। सीरम इंस्टीट्यूट जैसे संस्थान कोरोना वैक्सीन को सफलतापूर्वक बना पा रहे हैं। क्लीनिकल रिसर्च को एक नया प्लेटफॉर्म मिला है। कोरोना संकट काल से प्रभावित हर कंपनी अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट घटाना चाह रही है। यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। हमें इस अवसर का लाभ उठाकर भारत की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में काम करना चाहिए।

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प्रचेता बुधवार, सीनियर मैनेजर, एसेंचर, लंदन - फोटो : amar ujala
जिम्मेदारी का ख्याल रखना जरूरी
लंदन स्थित एसेंचर की सीनियर मैनेजर प्रचेता बुधवार का कहना है कि कोरोना ने हमें खूब सिखाया है। भारत के प्रति वैश्विक नजरिये में बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। ऐसे में सभी प्रवासी भारतीयों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह जिस भी कैपेसिटी में विश्व के अलग-अलग कोनों में काम कर रहे हों, भारत की छवि को धूमिल न होने दें। भारत की छवि को दिन-प्रतिदिन निखारने की अहम जिम्मेदारी प्रवासी भारतीयों के कंधों पर होती है।

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वर्तिका शुक्ला, इंफोसिस सॉफ्टवेयर, न्यूजर्सी - फोटो : amar ujala
साइबर सिक्योरिटी पर करना होगा काम
न्यूजर्सी स्थित इंफोसिस सॉफ्टवेयर से जुड़ीं वर्तिका शुक्ला का कहना है कि विश्व में करीब 17 मिलियन भारतीय प्रवास कर रहे हैं। लोग डिजिटल माध्यमों के जरिये ही एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। शिक्षा का क्षेत्र हो या कार्यस्थल, सब इंटरनेट के दम पर संभव हो पा रहा है। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी पर काम करना बेहद जरूरी हो जाता है। हमें इस दिशा में मजबूती से काम करना होगा।
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माधव शर्मा, गेम शो स्टार्टअप कंपनी के संचालक - फोटो : amar ujala
भारत का मजबूत नेटवर्क ही उसकी पहचान बनेगा
गेम शो स्टार्टअप कंपनी के संचालक माधव शर्मा का कहना है कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि नेटवर्किंग पर ध्यान दिया जाए। इसमें नेटवर्किंग स्किल्स का अहम योगदान है। हम जल्द ही कोडिंग के माध्यम से रोचक गेम्स बना रहे हैं, जिसे हम भारत से बाहर लेकर जाएंगे। वैश्विक स्तर पर हर घर में भारतीय गेम्स खेले जाएंगे। भारतीय कोडिंग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे भारत की छवि मजबूत होगी। जब हम इस दिशा में काम करेंगे तो हमें खुद को प्रेरित करना होगा।
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