जितनी तरह के श्वान उतने ही आकर्षण, यह नजारा था पुलिस लाइन का, जहां अवध केनेल क्लब ने अमर उजाला के सहयोग से डॉग शो आयोजित किया। इसमें लखनऊ के डॉग लवर्स और ब्रीडर्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 40 से अधिक नस्ल के श्वान प्रस्तुत किए गए। इस दौरान हुई विभिन्न गतिविधियों के बीच अमर उजाला ने विशेष फैशन शो भी आयोजित किया, जिसमें सात कैटेगरी के विजेता चुने गए।
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डॉग शो में सबसे ज्यादा जर्मन शेफर्ड नजर आए। शो क्वालिटी की नस्ल का जर्मन शेफर्ड सभी के आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा लेब्रा से लेकर बीगल, सेंट बर्नार्ड, अफगान हाउंड, हस्की, विभिन्न नस्लों के पूडल, डैश हाउंड, अमेरिकन कॉकर स्पेनियल, ग्रेट डेन आदि ने भी सभी को अपनी अदाओं से रोमांचित किया। ये सभी श्वान केनेल क्लब ऑफ इंडिया से पंजीकृत थे। वहीं अलीगढ़ डॉग वेलफेयर सोसाइटी और आगरा कैनाइन एसोसिएशन के पदाधिकारियों सहित कई श्वान प्रेमी यूपी और भारत के लगभग सभी राज्यों से आयोजन का हिस्सा बनने यहां पहुंचे थे।
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ट्रेंड डॉग्स के प्रति बढ़ रहा रुझाान
डॉग शो में डॉग ट्रेनर्स भी सभी की जिज्ञासा का केंद्र रहे। जाने माने ट्रेनर शाहिद अहमद ने बताया कि इस समय लखनऊ में ‘ओबीडियंस’ और ‘गार्ड डॉग’ ट्रेनिंग दिलवाने में नागरिक रुचि ले रहे हैं। करीब छह महीने की इस ट्रेनिंग में 30 हजार रुपये तक का खर्च आता है। यह खर्च श्वान की नस्ल पर भी निर्भर करता है। ‘ओबीडियंस’ ट्रेनिंग में दिव्यांग और बुजुर्ग नागरिकों के लिए श्वान एक सहयोगी की तरह काम करते हैं, वे घूमने साथ जाते हैं, कोई समस्या आने पर मदद बुलाने के लिए भी वे प्रशिक्षित होते हैं। इसके लिए लैब्राडोर और जर्मन शेफर्ड्स को अच्छा माना जाता था, लेकिन अब रामपुर हाउंड और चिपीपरई जैसी भारतीय नस्लें भी लोकप्रिय हो रही हैं। हाउस ट्रेनिंग में घर के अधिकतम सदस्यों तक से निर्देश लेना और उनका पालन करना सिखाया जाता है। गार्ड डॉग एक सुरक्षा प्रहरी की तरह काम करता है, जिस व्यक्ति को ऐसा श्वान गार्ड कर रहा होता है, उस व्यक्ति को कोई छू भी ले तो यह गार्ड डॉग हमला कर सकता है।
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फैशन शो में ये रहे विजेता
अमर उजाला द्वारा डॉग शो में फैशन शो भी आयोजित किया गया। इसमें रूस की जीनीयम जज बनीं। इसके अलावा अमर उजाला ने फ्री टैटू कैंप भी आयोजित किया था। इसमें भी युवाओं और किशोरों ने जमकर टैटू बनवाए।