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लखनऊ ने चिकित्सा के क्षेत्र में हासिल कीं ऐतिहासिक उपलब्धियां, सर्जरी के जरिए यूपी का नाम किया रोशन

Sat, 28 Dec 2019 05:03 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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लिवर प्रत्यारोपण कर इतिहास रचने वाली टीम - फोटो : अमर उजाला
चिकित्सा के क्षेत्र में लखनऊ ने बीते साल ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की। केजीएमयू ने लिवर ट्रांसप्लांट शुरू कर नई इबारत लिखी तो एसजीपीजीआई ने रोबोटिक सर्जरी के जरिये प्रदेश का नाम रोशन किया। इसी तरह आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय में गठिया शोध संस्थान खोलने की इजाजत मिली तो राजकीय होम्योपैथिक  मेडिकल कॉलेज में होम्योपैथिक प्रयोगशाला को मंजूरी मिली। इतना ही नहीं करीब पांच साल से प्रस्तावित लोहिया संस्थान और लोहिया चिकित्सालय के विलय को मंजूरी भी मिली। पेश है विभिन्न चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों में बीते साल में मिलीं उपलब्धियां और खामियों की पड़ताल करती रिपोर्ट :
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लोहिया संस्थान - फोटो : अमर उजाला
लोहिया संस्थान : विलय के बाद शुरू हुईं सुपर स्पेशियेलिटी सेवाएं
लोहिया संस्थान और अस्पताल के अक्तूबर में विलय से मरीजों को सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं मिलने लगी हैं। सरकार ने संस्थान को 396 करोड़ बजट दिया है। विलय से पहले संस्थान में 350 बेड थे। विलय के बाद लोहिया अस्पताल के 467 बेड मिल गए हैं। मातृ शिशु रेफरल केंद्र में 200 बेड हैं। इस तरह लोहिया संस्थान के पास कुल 1017 बेड हो गए हैं। लोहिया संस्थान के दूसरे कैंपस के रूप में विकसित होने वाले शहीद पथ का रेफरल हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया जाएगा। एक तरफ जहां हॉस्पिटल का विलय हुआ वहीं संस्थान के एकेडमिक ब्लॉक का भी मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया। इस बहुमंजिला एकेडमिक ब्लॉक में अत्याधुनिक सेमिनार रूम, क्लास रूम व लैब बनाए गए हैं।
किडनी प्रत्यारोपण से कमाया नाम लोहिया संस्थान की एक बड़ी उपलब्धि किडनी प्रत्यारोपण हैं। यहां करीब 55 किडनी प्रत्यारोपण हो चुके हैं। इसी तरह कैंसर मरीजों के लिए नई सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यहां तीन लीनियर  एक्सीलरेटर मशीनें लगी हैं।
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पीजीआई - फोटो : अमर उजाला
 पीजीआई भवन
पीजीआई : 57 मरीजों की हो चुकी रोबोटिक सर्जरी
एसजीपीजीआई में आठ जून से हुई रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धि है। अब तक करीब 57 मरीजों की रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी है। यह सर्जरी शुरू करने वाला पीजीआई प्रदेश का पहला संस्थान है। इसी तरह थैलेसीमिया के इलाज के लिए लिए कोल इंडिया की ओर से 10 करोड़ की मदद दी गई। इससे बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। इसी तरह यहां पुरानी ओपीडी को मरम्मत कराकर रेडियोथेरैपी व रेडियोडायग्नोसिस विभाग के मरीजों के लिए वार्ड की व्यवस्था की गई है। ऐसे में यहां कैंसर मरीजों का इलाज भी आसान हो गया है। यहां हर सप्ताह दो से तीन किडनी प्रत्यारोपण हो रहा है।

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लिवर प्रत्यारोपण कर इतिहास रचने वाली टीम - फोटो : अमर उजाला
केजीएमयू : नौ लिवर प्रत्यारोपण कर रचा इतिहास
केजीएमयू ने 14 मार्च को पहला लिवर प्रत्यारोपण कर ऐतिहासिक उपलब्धि की शुरुआत की। अब तक नौ लिवर प्रत्यारोपण हाे चुके हैं।
इसी तरह बेरियाटिक सर्जरी की शुरुआत हुई। टॉक्सिकोलॉजी लैब की भी नींव रखी गई। केजीएमयू में रेडियो कम्यूनिटी सेंटर स्थापित करने की योजना भी परवान चढ़ी।
मेडिसिन विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. डी. हिमांशु ने प्लाज्मा फेरेसिस के जरिये लिवर के मरीजों की जान बचाने में कामयाबी हासिल की। वहीं, गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी मेडिसिन विभाग को हेपेटाइटिस से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए नोडल सेंटर बनाया गया है।
बजट से मिला विस्तार
फरवरी में जारी बजट में केजीएमयू को 907 करोड़ रुपये दिए गए तो साल के अंत में पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स विभाग, आर्थोप्लास्टी विभाग, स्पाइन सर्जरी सेंटर और स्पोर्ट्स मेडिसिन विभाग के लिए नौ मंजिला भवन बनाने के लिए करीब 85 करोड़ की मंजूरी दी गई।

 
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रैन बसेरा - फोटो : अमर उजाला
...लेकिन इन कमियों से जूझे मरीज
डायलिसिस यूनिट बंद
डायलिसिस लगाने वाली कंपनी और केजीएमयू प्रशासन के बीच हिसाब-किताब को लेकर चली खींचतान में जनवरी में डायलिसिस यूनिट लड़खड़ाती रही।
...लेकिन इन कमियों से जूझे मरीज
 
नहीं शुरू हो पाया रैन बसेरा
केजीएमयूू में बने हाईटेक रैन बसेरे का उद्घाटन 25 दिसंबर 2018 को लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह कर चुके हैं। अभी तक यह रैन बसेरा शुरू नहीं हो सका है।

संस्थान छोड़ चले गए कई संकाय सदस्य
बीते साल कई संकाय सदस्य यूनिवर्सिटी छोड़ कर चले गए। नर्सिंग की डॉ. फौजिया जोवद, क्लीनिकल इंस्ट्रक्टर कीर्ति मोहन शैली व रेडियोडायग्नोसिस विभाग की डॉ. अंजुम सईद, गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉ. साकेत कुमार, सीटीवीएस विभाग के डॉ. विजयंत देवनराज, न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. सुनील, इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. मधुकर मित्तल, अस्पताल प्रबंधन के डॉ. यूपी मिश्रा इस्तीफा दे चुके हैं। केजीएमयू में नेफ्रोलॉजी और इंडोक्राइनोलॉजी की सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं बंद हैं। इन दोनों विभागों में एक-एक संकाय सदस्य मौजूद थे। इसी तरह एक प्रोफेसर डिमोट किया गया तो दूसरे के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई। हालांकि इन्हें कोर्ट से राहत मिल गई है। अब एक अन्य असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ भी जांच चल रही है। यहां करीब 250 से अधिक पद खाली चल रहे हैं।
 
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सीटी स्कैन - फोटो : अमर उजाला
सीटी स्कैन मशीन से मरीजों को मिली राहत
सिविल में इस साल ही पीपीपी मॉडल पर सीटी स्कैन मशीन स्थापित की गई। यहां मुफ्त जांच की जा रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से बलरामपुर अस्पताल में अत्याधुनिक सीटी स्कैैन मशीन लगाई गई। वहीं बीआरडी महानगर में इस साल 10 बेड की इमरजेंसी बन गई है, जहां जल्द ही मरीज भर्ती किए जाएंगे। उधर, लोकबंधु अस्पताल की छह बेड की इमरजेेंसी का विस्तार करके 20 बेड की कर दी गई।


 
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रेडियोग्राफी मशीन - फोटो : अमर उजाला
मिली कंप्यूटराइज्ड रेडियोग्राफी मशीन
सिविल में कंप्यूटराइड रेडियोग्राफी मशीन लगाई गई। इसमें सामान्य एक्स-रे से भी डिजिटल फिल्म आएगी। वहीं पैथोलॉजी जांच के जरिए मरीजों में अविकसित प्लेटलेट्स का पता लगाया जा सकेगा। यह जांच किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं होती है



 

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इनसे मिली निराशा
कैंसर संस्थान का होता रहा इंतजार

करोड़ रुपये की लागत से चकगंजरिया में तैयार कैंसर संस्थान शुरू होने की उम्मीदें परवान नहीं चढ़ पाईं। सालभर इसके उद्घाटन की तिथि स्थगित होती रही। कुछ निर्माण कार्य बचे हैं।  संस्थान में 59 चिकित्सा विशेषज्ञों के पद हैं, पर यहां 21 संकाय सदस्य ही हैं। इसी तरह सीनियर रेजीडेंट के 65 और जूनियर रेजीडेंट के 63 पद स्वीकृत हैं, लेकिन अभी भर्ती प्रक्रिया ही चल रही है। यहां पहले चरण में सिर्फ 500 बेड का अस्पताल तैयार किया जा रहा है। अब नए साल में इसकी शुरुआत की उम्मीद है।

दवाओं का रहा संकट
सरकारी अस्पतालों में वर्ष 2019 में इलाज की सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई, लेकिन दवाओं का संकट रहा। रुई-पट्टी तक मरीजों को खरीदनी पड़ी। बलरामपुर, सिविल, लोकबंधु, बीआरडी महानगर समेत अन्य अस्पतालों में ड्रग काॅरपोरेशन की लापरवाही से सामान्य दवाएं तक मरीजों को नहीं मिल पाई। उल्टी-दस्त की दवा भी अस्पताल से नहीं मिलीं। शुगर, बीपी, पैरासिटामॉल इंजेक्शन, कोलेस्ट्रॉल की दवा समेत कई दवाओं का संकट पूरे साल बना रहा।

राजधानी में कॉरपोरेट अस्पताल भी खुले
साल 2019 में राजधानी में दो नए काॅरपोरेट अस्पताल खुले। जिन मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जाना पड़ता था, उन्हें यह सुविधा राजधानी में मिलने लगी है। शहर के चिकित्सा संस्थानों तैयार हो रहे नए चिकित्सकों को इन कॉरपोरेट अस्पतालों ने ठौर दिया है। कुछ पुराने संकाय सदस्य भी यहां पहुंचे हैं। केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान में रेजिडेंट के रूप में कार्यकाल पूरा करने वाले करीब 25 डॉक्टरों को इन काॅरपोरेट अस्पतालों ने काम दिया है।
 

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प्रो. एमएलबी भट्ट - फोटो : अमर उजाला
पूरे एशिया में बनी केजीएमयू की पहचान
बीते की बात

केजीएमयू की पहचान पूरे एशिया में है। यहां के चिकित्सक विश्व में फैले हुए हैं। चिकित्सा की गुणवत्ता और बेहतरीन प्रशिक्षण हमारी थाती है। इसे मजबूत करने की दिशा में निरंतर काम किया जा रहा है। संस्थान में कई नए विभाग खुले हैं। भविष्य में इन्हें विस्तारित किया जाएगा। इलाज से लेकर चिकित्सा शिक्षा में नए आयाम हासिल करने की दिशा में भी कदम बढे़ हैं। ये कदम निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे। - प्रो. एमएलबी भट्ट, कुलपति केजीएमयू

 
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एके त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
आगे का आगाज
मरीजों को जल्द मिलेंगी सुपर स्पेशिएलिटी सेवाएं

लोहिया संस्थान और संजय गांधी पीजीआई तरक्की की नई इबारत लिख रहे हैं। चिकित्सा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ ही बेहतरीन चिकित्सक पैदा किए जा रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट में संस्थान नंबर एक पर है। अन्य सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं। लोहिया संस्थान को लोहिया अस्पताल मिल गया है। इससे यहां मरीजों को सुपर स्पेशिएलिटी सेवाएं मिल सकेंगी।
- प्रो. एके त्रिपाठी, निदेशक लोहिया संस्थान और एसजीपीजीआई
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