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सपा नेताओं का करीबी है वकील शिशिर त्रिपाठी की हत्या का आरोपी, फेसबुक पोस्ट से हुआ खुलासा

Thu, 09 Jan 2020 07:55 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सपा नेताओं के साथ आरोपी विनायक (लाल घेरे में) - फोटो : अमर उजाला
कृष्णानगर के दामोदरनगर इलाके में मंगलवार देर रात अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी (32) की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मामले में आरोपी विनायक ठाकुर उर्फ विनायक बच्चन सिंह सपा नेताओं का करीबी है। फेसबुक प्रोफाइल पर उसने पूर्व मुख्यमंत्री के साथ और सपा के तत्कालीन नगर अध्यक्ष फाकिर सिद्दीकी समेत कई नेताओं के साथ के फोटो पोस्ट किए हैं। सीओ कृष्णानगर अमित कुमार राय ने बताया कि विनायक ठाकुर के खिलाफ कृष्णानगर में शिशिर की हत्या समेत हत्या की कोशिश, गुंडा एक्ट समेत छह मामले दर्ज हैं।

चार जनवरी 2015 को उसे सरोजनीनगर की एलडीए कॉलोनी सेक्टर एफ निवासी छात्र अभिषेक सिंह की दुर्घटना में मौत के मामले में रोहित, अंकित, कुशाग्र, गुल्लू और वैभव के साथ गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। 27 मार्च 2018 को कनौसी में रहने वाले योगेंद्र प्रसाद सिंह उर्फ भोंपू सिंह पर जानलेवा हमले के आरोप में उसे व कशिश को गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई भी की जा चुकी है।
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- फोटो : अमर उजाला
वारदात के सीसीटीवी फुटेज में इलाके के ही नामजद आरोपी उपेंद्र तिवारी उर्फ मोनू, विनायक ठाकुर, धीरज कुमार, मुस्तफा और शुभम यादव मिलकर शिशिर को मारते हुए नजर आ रहे हैं। शिशिर के बुरी तरह घायल होने की सूचना पर परिवार वाले ट्रॉमा सेंटर ले गए जहां उसने दम तोड़ दिया।

शिशिर के बड़े भाई शरद ने नामजद आरोपियों समेत उनके अन्य साथियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया है। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि आरोपी विनायक को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य की तलाश की जा रही है। एसएसपी ने कृष्णानगर कोतवाली के इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह को निलंबित कर दिया है। फिलहाल पुलिस लेन-देन व अन्य विवादों को खंगाल रही है।
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- फोटो : अमर उजाला
सिर-गर्दन व चेहरे पर ब्लेड से 13 वार
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शिशिर के सिर-गर्दन व चेहरे पर ब्लेड से 13 वार किए जाने की बात सामने आई है। शिशिर का बायां कान कट गया जबकि सिर पर चार, जबड़े पर दो, गर्दन के आगे व पीछे तीन-तीन वार किए गए। हाथ-पैरों पर डंडे से मार के भी निशान थे।

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- फोटो : अमर उजाला
गांजा बेचने से रोका तो तस्कर ने कर दिया कत्ल
कृष्णानगर के वीआईपी रोड स्थित स्नेहनगर निवासी अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी की हत्या के आरोपी दामोदरनगर निवासी उपेंद्र तिवारी उर्फ मोनू और विनायक ठाकुर इलाके में गांजा बिकवाते थे। शिशिर ने विरोध किया तो दोनों से तनातनी शुरू हो गई। गांजा बिक्री बंद न करने पर शिशिर ने मोनू के साथी अनिल कुमार वर्मा को नशीले पदार्थ के साथ गिरफ्तार करा दिया। इसके अलावा लेन-देन के झगड़े में शिशिर पांच दिन पहले मोनू को पकड़कर घर ले आया था। शिशिर के भाई शरद का आरोप है कि इससे बौखलाकर ही मोनू ने उसकी हत्या कर दी। शिशिर  मूलरूप से कानपुर के रहने वाले थे।
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शिशिर त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
शरद का कहना है कि शिशिर ने इलाके में गांजा और नशीले पदार्थों की बिक्री के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था। उसने मोनू को भी गांजा की सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी थी। उसने स्थानीय पुलिस से कई बार नशीले पदार्थों की खुलेआम खरीद-फरोख्त की शिकायत भी की। पुलिस ने ध्यान नहीं दिया तो शिशिर ने आला अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 24 दिसंबर को उसने अनिल कुमार वर्मा को 900 ग्राम डोडा समेत गिरफ्तार कराया था। शरद ने बताया कि अनिल कुमार वर्मा गांजा तस्कर उपेंद्र तिवारी उर्फ मोनू का आदमी था। मोनू को पता चला कि पुलिस ने शिशिर की मुखबिरी पर ही उसके साथी को गिरफ्तार किया है।
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- फोटो : अमर उजाला
शिशिर की वजह से मोनू का इलाके में नशीले पदार्थों का कारोबार बंद हो गया था। यही वजह है कि उसने बदला लेने के लिए वारदात कर डाली। पुलिस इस दिशा में भी छानबीन कर रही है। शरद ने बताया कि मोनू ने करीब दस महीने पहले शिशिर से दस हजार रुपये लिए थे। जो जल्द लौटाने की बात कही थी। पांच दिन पहले शिशिर ने अपना रुपये वापस मांगा तो उसने टाल दिया। इसपर शिशिर उसे पकड़कर घर ले आया और मोनू से मांफी मंगवाई। मोनू ने दो दिन में रुपये लौटाने की बात कही थी।
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- फोटो : अमर उजाला
एक महीने के भीतर हत्या की दी थी धमकी
शरद ने बताया कि मोनू ने उसके भाई को एक महीने के भीतर हत्या की धमकी दी थी। इलाके में करीब 20 दिन से मोनू का नशीले पदार्थों का धंधा बंद हो गया था। वह इलाके में घूम-घूमकर एक महीने के भीतर शिशिर को जान से मारने की धमकी दे रहा था। शिशिर मंगलवार को शराब नहीं पीता था। उसे फुसलाकर शराब पिलाई गई और फिर मारा गया।

उसने बताया कि घर पर रुपया देने के बहाने आने वाले लोग कौन थे? इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। जो लोग आए थे, वह मोनू के साथी हो सकते हैं। हो सकता है कि मोनू ने शिशिर को बहाने से बुलवाया हो और उसे शराब पिलाकर हत्या कर दी हो। शरद ने बताया कि घर पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

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- फोटो : अमर उजाला
मोनू के काले कारोबार का चिट्ठा खुलवाने की दी थी चेतावनी
शिशिर ने मोनू के काले कारोबार का चिट्ठा खुलवाने की चेतावनी भी दी थी। परिवारीजनों ने बताया कि इलाके में नशीले पदार्थों का काम करने के लिए मोनू ने बीते दिन ही शिशिर को दो लाख रुपया देने की पेशकश भी की थी। उसने खुद को शिशिर का भाई बताते हुए पीछे न पड़ने की बात कही। हालांकि, वह नहीं माना और अपने मुहल्ले व आसपास के इलाके को नशामुक्त करने की बात कहते हुए उसका चिट्ठा खुलवाने की चेतावनी देते हुए भगा दिया।

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- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम हाउस को बनाया छावनी
पोस्टमार्टम हाउस पर बवाल की आशंका से उसे चारों तरफ से घेर दिया गया था। पोस्टमार्टम हाउस जाने वाले सभी रास्ते बैरीकेडिंग से बंद कर दिए गए, जिसकी वजह से टीले वाली मस्जिद के आसपास यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई। दोपहर करीब साढे़ बारह बजे शिशिर का शव लेकर वकील कलेक्ट्रेट रवाना हुए, तब बैरीकेडिंग हटाई गई।

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शिशिर त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
पिता का आरोप: पुलिस कार्रवाई करती तो जिंदा होता शिशिर
शिशिर के पिता एचएएल से बतौर स्टोर इंचार्ज रिटायर गोपीचंद्र और परिवारीजनों ने हत्या के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताया है। गोपीचंद्र का कहना था कि 18 दिसंबर 2019 की रात मोनू ने सिंगारनगर चौराहे पर प्रेमनगर निवासी व केकेसी से बीकॉम की पढ़ाई कर रहे संतोष कुमार रावत को रोककर गुंडागर्दी की थी। उसने संतोष से सिगरेट मंगाई। मना करने पर मारपीट की। मोनू व उसके साथ मौजूद शुभम यादव, मुस्तफा अहमद, अतुल पांडेय, अंकित, धीरज ने पीटा। मोनू ने संतोष के सिर पर पिस्टल तानकर गोली मारने की धमकी दी।

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शिशिर त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
संतोष जान बचाकर भागा तो पीछे से गोली चलाई, लेकिन वह बाल-बाल बच गया और एक घर में घुसकर छिप गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे घर पहुंचाया था। गोपीचंद्र का कहना है कि मोनू को कृष्णानगर पुलिस हत्या, लूट व असलहा बरामदगी के आरोप में तीन बार जेल भेज चुकी है। संतोष की शिकायत के बाद पुलिस अगर मोनू व गुर्गों को पकड़ लेती तो शायद शिशिर की जान बच जाती।

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शिशिर त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
शिवपाल को लौटाया
अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी की हत्या की जानकारी पाकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के संस्थापक शिवपाल यादव कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन वकीलों ने राजनीति न करने के नारे लगाते हुए उन्हें लौटा दिया। कुछ देर तक कलेक्ट्रेट में रुककर शिवपाल यादव लौट गए।

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शिशिर त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शन से कलेक्ट्रेट में काम काज ठप
अधिवक्ता की मौत से आक्रोशित साथी वकीलों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर के कोर्ट कक्ष के समक्ष शव रखकर मृतक के परिवार को एक करोड़ की मुआवजा राशि देने सहित कई मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। आक्रोशित वकील डीएम से मिलने की मांग पर अड़े थे। एडीएम सिटी पश्चिम संतोष कुमार वैश्य ने एएसपी पश्चिम विकास चंद्र त्रिपाठी व एडीएम वित्त व राजस्व वैभव मिश्रा के साथ मामला शांत कराने की कमान संभाली।

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शिशिर त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
स्थिति संभालने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने सेंट्रल बार व लखनऊ बार के पदाधिकारियों को भरोसे में लेते हुए प्रशासन की तरफ से मृतक के परिवारीजनों को दो लाख की राहत राशि दिलवाने और सीएम को संबोधित ज्ञापन सीएम तक पहुंचाने का भरोसा दिला प्रदर्शन खत्म कराया। इस दौरान अधिकारियों से लेकर कर्मचारी व फरियादियों तक में तीन घंटे तक दहशत रही।

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शिशिर त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
ये है वारदात का टाइम चार्ट
मंगलवार रात
11.30 बजे : दामोदरनगर में अधिवक्ता को पीट-पीटकर लहूलुहान किया
12.15 बजे : परिवारीजन अधिवक्ता को अस्पताल ले गए, जहां हुई मौत

बुधवार सुबह
11.00 बजे : पोस्टमार्टम हाउस पर वकीलों ने हंगामा व प्रदर्शन शुरू किया
12.40 बजे : अधिवक्ता का शव सेंट्रल बार एसोसिएशन कार्यालय पहुंचा
1.20 बजे : कलेक्ट्रेट परिसर में शव रखकर प्रदर्शन व नारेबाजी की
2.30 बजे : अधिकारियों के आश्वासन के बाद वकील शव लेकर लौटे

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी मोनू - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दिया मदद का भरोसा: कांग्रेस पार्टी के कार्यसमिति सदस्य व पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने शिशिर के परिवारीजनों से मिलकर हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। अंतिम संस्कार में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी, अनुशासन समिति के सदस्य श्याम किशोर शुक्ला, लखनऊ के प्रभारी रमेश शुक्ला, शहर अध्यक्ष मुकेश सिंह चौहान, वरिष्ठ नेता वीरेंद्र मदान, सरोज शुक्ला, बृजेंद्र कुमार सिंह शामिल हुए। विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने भी अधिवक्ता के घर जाकर परिवारीजनों से संवेदना व्यक्त की। उधर, कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने बैकुंधाम जाकर शोक संवेदना जताई। (पुलिस की गिरफ्त में आरोपी मोनू)

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी विनायक। - फोटो : अमर उजाला
20 दिन से चल रही थी तनातनी
शिशिर के भाई शरद ने बताया कि हत्या के आरोपी उपेंद्र तिवारी उर्फ मोनू और विनायक ठाकुर पहले साथ ही थे। उनका अक्सर घर आना-जाना था। परिवार के सभी लोग उन्हें जानते हैं। सीओ कृष्णानगर अमित कुमार राय का कहना है कि बीते 20 दिन से दोनों पक्ष में किसी बात को लेकर तनातनी चल रही थी। यह तनातनी क्यों शुरू हुई? फिलहाल इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। सीओ ने कहा कि उपेंद्र तिवारी उर्फ मोनू से पूछताछ के बाद सच्चाई सामने आएगी। (पुलिस की गिरफ्त में आरोपी विनायक।)

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दो लाख रुपये की मदद का दिया आश्वासन
वकीलों के हंगामे को देखते हुए डीएम के निर्देश पर एडीएम सिटी पश्चिम संतोष कुमार वैश्य ने वकीलों से मुलाकात कर सेंट्रल बार एसोसिएशन का ज्ञापन लिया और प्रशासन की तरफ से दो लाख रुपये की आर्थिक मदद देने, इंस्पेक्टर कृष्णानगर को निलंबित करने और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी करने का आश्वासन दिया। इस दौरान एएसपी पूर्वी सुरेश कुमार रावत ने वकीलों को बताया कि एक आरोपी विनायक ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया गया है। (आरोपी मोनू को जेल भेज दिया गया।)

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सेंट्रल बार ने की आर्थिक सहायता की मांग
शिशिर का शव सेंट्रल बार एसोसिएशन के कार्यालय में मेज पर रखकर अधिवक्ताओं ने दो मिनट का मौन रखा। एसोसिएशन के अध्यक्ष आदेश कुमार सिंह व महामंत्री संजीव पांडेय ने परिवारीजनों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने और शिशिर के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग की। सेंट्रल बार एसोसिएशन ने लोक भवन जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मांग से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
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सेंट्रल बार ने रखीं ये मांगें...।
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