यूपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल दलाली का अड्डा बन चुकी है। बीफार्मा, फार्मासिस्ट, फार्मा डी या अन्य किसी विधा के पंजीकरण के दलाल 13 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं, जबकि इसकी फीस 1550 रुपये है। यह सेवा शुल्क काम जल्द कराने के नाम पर वसूला जा रहा है। रकम वसूलने वाले दलालों का दावा है कि वे 15 दिन में पंजीकरण के दस्तावेज सौंप देंगे, जबकि इसमें आठ से नौ महीने का समय लग जाता है। ‘अमर उजाला’ की ओर से शुक्रवार को की गई पड़ताल में यह हकीकत सामने आई। पेश है रिपोर्ट-
दलाल से बातचीत के अंश :
रिपोर्टर- भइया, कई दिन से चक्कर लगा रहे हैं, पर पंजीकरण नहीं हो पा रहा।
दलाल- कागज दिखाओ... यह तो गैर जनपद का है, काम हो जाएगा पर खर्च लगेगा।
रिपोर्टर- कितना खर्च आएगा और कब तक काम हो पाएगा।
दलाल- 12 हजार रुपये दोगे तो कागज घर पर डाक से पहुंचेगा। 13 हजार दिए तो 15वें दिन हाथों-हाथ कागज मिल जाएगा। नियम से चलोगे तो नौ महीने तक घूमते रहो।
रिपोर्टर- फार्मेसी काउंसिल कर्मचारी बोल रहे कि किसी के चक्कर में न फंसना।
दलाल- फार्मेसी काउंसिल में बैठे कर्मचारी ही हमारे जरिये सेटिंग करवाते हैं। हमारी यहां दुकान है, कोई फरेबी नहीं जो रुपये लेकर निकल जाएंगे।
रिपोर्टर- भइया, 12 हजार ले लीजिए, हाथ में पेपर दिलवा दीजिए, बहुत दिन से दौड़ रहे हैं।
दलाल- नहीं, 12 हजार में काम नहीं हो पाएगा।
रिपोर्टर- चलिए, आपका नंबर मेरे पास है। रुपये का जुगाड़ करके मिलता हूं।