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अमर उजाला पड़ताल: दलाली का अड्डा बनी यूपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल, शुल्क 1550 रुपये, वसूले जा रहे 13 हजार

Sat, 14 May 2022 05:44 PM IST
ishwar ashish हिमांशु अवस्थी/कुलदीप सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
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पैसे मांगने वाला दलाल। - फोटो : amar ujala
यूपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल दलाली का अड्डा बन चुकी है। बीफार्मा, फार्मासिस्ट, फार्मा डी या अन्य किसी विधा के पंजीकरण के दलाल 13 हजार रुपये तक वसूल रहे हैं, जबकि इसकी फीस 1550 रुपये है। यह सेवा शुल्क काम जल्द कराने के नाम पर वसूला जा रहा है। रकम वसूलने वाले दलालों का दावा है कि वे 15 दिन में पंजीकरण के दस्तावेज सौंप देंगे, जबकि इसमें आठ से नौ महीने का समय लग जाता है। ‘अमर उजाला’ की ओर से शुक्रवार को की गई पड़ताल में यह हकीकत सामने आई। पेश है रिपोर्ट-

दलाल से बातचीत के अंश :
रिपोर्टर- भइया, कई दिन से चक्कर लगा रहे हैं, पर पंजीकरण नहीं हो पा रहा।
दलाल- कागज दिखाओ... यह तो गैर जनपद का है, काम हो जाएगा पर खर्च लगेगा।
रिपोर्टर- कितना खर्च आएगा और कब तक काम हो पाएगा।
दलाल- 12 हजार रुपये दोगे तो कागज घर पर डाक से पहुंचेगा। 13 हजार दिए तो 15वें दिन हाथों-हाथ कागज मिल जाएगा। नियम से चलोगे तो नौ महीने तक घूमते रहो।
रिपोर्टर- फार्मेसी काउंसिल कर्मचारी बोल रहे कि किसी के चक्कर में न फंसना।
दलाल- फार्मेसी काउंसिल में बैठे कर्मचारी ही हमारे जरिये सेटिंग करवाते हैं। हमारी यहां दुकान है, कोई फरेबी नहीं जो रुपये लेकर निकल जाएंगे।
रिपोर्टर- भइया, 12 हजार ले लीजिए, हाथ में पेपर दिलवा दीजिए, बहुत दिन से दौड़ रहे हैं।
दलाल- नहीं, 12 हजार में काम नहीं हो पाएगा।
रिपोर्टर- चलिए, आपका नंबर मेरे पास है। रुपये का जुगाड़ करके मिलता हूं।
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हर फाइल के सौ रुपये लिए जा रहे हैं। - फोटो : amar ujala
फाइल चार्ज के भी वसूल रहे 100 रुपये
फार्मेसी का रजिस्ट्रेशन करवाने आने वालों की फाइल बिना सुविधा शुल्क लिए जमा तक नहीं होती है। सुबह 11 बजे फार्मेसी काउंसिल के हॉल में अभ्यर्थियों को बुलाया जा रहा था। कर्मचारी दस्तावेज की पड़ताल के बाद सभी से फाइल चार्ज के नाम पर सौ रुपये वसूल रहे थे। इसका वीडियो बनने के बाद भी उन पर फर्क नहीं पड़ा। सुबह से शाम तक 200 से अधिक अभ्यर्थियों से करीब 20-25 हजार रुपये वसूलने का आरोप है।
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- फोटो : amar ujala
रुपये नहीं दिए तो धक्के देकर खदेड़ा
मुजफ्फरनगर से हरीश चौधरी भतीजे का बीफार्मा का पंजीकरण कराने के लिए सुबह छह बजे ही पहुंच गए थे। ऑफिस खुला तो पंजीकरण के लिए मिले स्लॉट के आधार पर हॉल में चले गए। उनके भतीजे ने रुपये नहीं दिए तो फाइल में खामी निकालकर उसे धक्के देकर हॉल से निकाल दिया। यह देख हरीश चौधरी ने विरोध जताया तो कर्मचारी उनसे भिड़ गए। करीब दस मिनट तक हंगामा होता रहा।

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pharmacy - फोटो : amar ujala
सीढ़ी पर मिली शराब की खाली बोतल
फार्मेसी काउंसिल परिसर की सीढ़ी पर शराब-बीयर के खाली केन और बोतलों का ढेर मिला। आरोप है कि शाम को ऑफिस बंद होने के बाद यहां कर्मचारी पैग लड़ाते हैं। यह भी कहा जाता है कि अफसरों को इसकी जानकारी है, फिर भी कार्रवाई नहीं होती।
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- फोटो : amar ujala
यूपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. वेद्रवत सिंह का कहना है कि फार्मेसी काउंसिल में पारदर्शिता लाने के लिए सभी कामकाज मेरे जरिये ऑनलाइन कराए गए हैं। जो भी वीडियो साक्ष्य के तौर पर हैं, उनकी तहकीकात कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। फाइल चार्ज के नाम पर शुल्क लेना गलत है। परिसर में शराब की खाली बोतल मिलने की जांच कराई जाएगी।
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