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कोरोना योद्धा: पर्दे के पीछे रहकर लड़ रहे जंग, न खाने की चिंता न सोने की फिक्र

Thu, 23 Apr 2020 05:40 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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कोरोना फाइटर्स - फोटो : amar ujala
केजीएमयू में कई वरिष्ठ चिकित्सक पर्दे के पीछे रहकर कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। ये भले ही वार्ड में ड्यूटी न कर रहे हों लेकिन सुबह से देर रात तक योजना बनाने और उसे अंजाम तक पहुंचाने में लगे रहते हैं। मरीजों की दवा से लेकर वार्ड में ड्यूटी लगाने तक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस दौरान इन्हें न तो खाने की फिक्र रहती है और न सोने की। बस चिंता है तो इस बात की कि इलाज में कहीं से कोई कमी न रह जाए। यहां व्यवस्थाओं के लिए 10 कमेटियां बनी हुई हैं। पेश है प्रमुख जिम्मेदारियां निभा रहे वरिष्ठ डॉक्टरों पर एक रिपोर्ट:

 
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डॉ. एसएन शंखवार। - फोटो : amar ujala
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के साथ यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष की भी जिम्मेदारी निभा रहे प्रो. एसएन शंखवार का ज्यादा वक्त परिसर में ही बीत रहा है। इन दिनों तड़के ही परिसर में जुट जाते हैं। सफाई व्यवस्था से लेकर वार्ड की निगरानी करते हैं। तब तक बैठकों का दौर शुरू हो जाता है। वे ज्यादातर कमेटियों में हैं। एक के बाद एक बैठक और व्यवस्थाओं के समन्वय में शाम हो जाती है। कई बार देर रात तक परिसर में ही नजर आते हैं। 
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डॉ. अनिल चंद्रा - फोटो : amar ujala
डेंटल संकाय के डीन प्रो. अनिल चंद्रा के पास कई जिम्मेदारी हैं। वह व्यवस्था से जुड़ी कमेटियों के साथ ही क्वारंटीन किए गए लोगों की निगरानी भी रखते हैं। उनके खाने से कमरे में सफाई तक की व्यवस्था पर नजर रखते हैं। ऐसे में कुलपति कार्यालय से दंत संकाय और क्वारंटीन के लिए तय किए गए होटलों तक चक्कर काटते नजर आते हैं। 

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डॉ. वीके ओझा। - फोटो : amar ujala
मुश्किल वक्त में निभा रहे अपनी जिम्मेदारी
न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष के साथ चिकित्सा अधीक्षक बने प्रोफेसर डॉ. वीके ओझा दवाओं से लेकर सर्जिकल और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कोरोना पॉजिटिव मरीजों और इलाज में लगे चिकित्सकों को सभी सामग्री मिल रही हैं या नहीं, यह सुनिश्चित कराते हैं। इसके अलावा अस्पताल की आंतरिक व्यवस्थाएं मुकम्मल रखना भी इनकी जिम्मेदारी है।  


 
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डॉ. केके सावलानी। - फोटो : amar ujala
मेडिसिन विभाग के प्रो. केके सावलानी इन दिनों अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह सुबह परिसर में पहुंच जाते हैं। इलाज की तकनीक का अध्ययन करते हैं। फिर मानव संसाधन की समीक्षा करते हैं। किस कर्मचारी और डॉक्टर की ड्यूटी वार्ड में लगी और किसे छुट्टी पर भेजना है, यह तय करने में जुट जाते हैं।
 
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डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव। - फोटो : amar ujala
रेडियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. कीर्ति श्रीवास्तव पर्यावरण सेल की भी जिम्मेदारी निभाती हैं। वार्ड में भर्ती मरीजों और चिकित्सक व चिकित्साकर्मियों को पौष्टिक भोजन मिल रहा है या नहीं, इसकी निगरानी रखती हैं। साथ ही अन्य स्टॉफ की व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाती हैं। कौन सा स्टाफ क्वांरटीन में है और किसका समय पूरा हो चुका है और कौन जाने वाला है, इसका लेखा-जोखा रखती हैं।  

 
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डॉ. परवेज। - फोटो : amar ujala
एनेस्थिसिया विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद परवेज पर्यावरण सेल की हार्ड कोर टीम में हैं। वह परिसर की सुरक्षा, सफाई से लेकर अन्य सामग्री के निस्तारण, पॉजिटिव मरीजों के वार्ड से निकलने वाली सामग्री को गाइडलाइन के अनुसार निस्तारित कराते हैं।  मैन पॉवर प्रबंधन में भी मदद करते हैं। स्टॉफ की काउंसलिंग भी करते हैं। 

 

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डॉ. पीके शर्मा। - फोटो : amar ujala
न्यूरोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पीके शर्मा रेजीडेंट डॉक्टरों का प्रबंधन देख रहे हैं। रेजीडेंटों की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार एक-एक विभाग की लगाई जा रही है। हर टीम में दो सीनियर रेजीडेंट और चार जूनियर रेजीडेंट की ड्यूटी लगती है। केजीएमयू में करीब एक हजार से ज्यादा रेजीडेंट हैं।    
  
 
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डॉ. प्रज्ञा पांडेय। - फोटो : amar ujala
कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रज्ञा पांडेय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की ड्यूटी प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रही हैं। सफाई कर्मियों से लेकर वार्ड ब्वॉय को समझाना और उन्हें ड्यूटी के लिए मानसिक रूप से तैयार करना होता है। आपात स्थिति में ड्यूटी पर किसे बुलाया जा सकता है, तय करती हैं।
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