राजधानी लखनऊ के चौक इलाके में एक साहूकार ने रविवार सुबह गहरी नींद में सो रहे अपने इकलौते बेटे को दो गोलियां मारी। इसके बाद कनपटी से रिवॉल्वर की नाल सटाकर खुद को गोली मार ली।
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- फोटो : amar ujala
मॉर्निंग वॉक से लौटी पत्नी ने भतीजे की मदद से बेडरूम का दरवाजा तोड़ा तो पति व बेटे के खून से लथपथ शव पड़े थे। साहूकार ने किडनी ट्रांसप्लांट में 25 लाख से अधिक खर्च करके बेटे की जान बचाई थी।
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इसके साथ कारोबार चौपट होने से डिप्रेशन का शिकार हो गया था। नींद की गोलियां खाने की लत लग गई थी। एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि चौक के राजा बाजार स्थित सीता भवन में रहने वाले साहूकार मनोज रस्तोगी (48) ने रविवार सुबह 6:30 बजे बेडरूम का दरवाजा भीतर से बंद किया।
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चादर ओढ़े गहरी नींद में सो रहे इकलौते बेटे रोहित (24) को लाइसेंसी रिवॉल्वर से दो गोलियां मारी। एक गोली दाहिनी कनपटी व दूसरी जबड़े पर लगी थी। इसके बाद कनपटी से नॉल सटाकर खुद को भी उड़ा लिया। मॉर्निंग वॉक से लौटी पत्नी ऋतु ने कुंडी खटखटाई।
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आहट न होने पर दरवाजा भड़भड़ाने के साथ शोर मचाने लगी। प्रथम तल पर रहने वाले जेठ रवि रस्तोगी का बेटा अंकित आ गया। आंगन में रखे डंडे से दरवाजे पर लगा शीशा तोड़कर झांका। बेड पर रोहित का खून से लथपथ शव पड़ा दिखा।
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शोर मचाकर परिवार के अन्य लोगों को बुलाने के साथ दरवाजा तोड़ा तो फर्श पर मनोज रस्तोगी के शव के पास उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर पड़ी नजर आई। पति व बेटे का खून से लथपथ शव देखकर ऋतु गश खाकर गिर गई।
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माजरा समझने के साथ भतीजे अंकित ने पुलिस को फोन किया। इंस्पेक्टर चौक सुधाकर पांडेय ने मौके पर पहुंचकर रिवॉल्वर कब्जे में ली और दोनों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने के साथ बेडरूम में छानबीन की लेकिन सुसाइ़ड नोट नहीं मिला।
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ढाई साल से परेशानी से घिरा था मनोज
एसएसपी ने मौके पर जाकर परिवार को ढांढस बंधाने के साथ तहकीकात की। बिलख रही ऋतु ने बताया कि पति मनोज का मनीलैंडिंग का अच्छा धंधा चलता था। इकलौते बेटे रोहित ने तीन साल पहले एमबीए पास किया था। इसके बाद बीमारी ने जकड़ा। पता चला कि उसके दोनों गुर्दे खराब हैं।
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मनोज ने अनेक जांचों के साथ कानूनी प्रक्रिया पूरी करके रोहित को कोलकाता के बड़े अस्पताल में भर्ती कराकर किडनी ट्रांसप्लांट कराई। इसमें 25 लाख से अधिक का खर्च आया था। करीब ढाई साल कोलकाता की दौड़ लगानी पड़ी।
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छह महीने पहले रोहित को घर ले आए। इलाज जारी था। लंबे समय तक कोलकाता में रहने की वजह से व्यापार चौपट हो गया। मनोज से जुड़े अनेक लोग दूसरे साहूकारों के संपर्क में चले गए थे।
डिप्रेशन में खाने लगा नींद की गोलियां
हजरतगंज में दवा की दुकान करने वाले बड़े भाई रवि रस्तोगी ने एसएसपी को जानकारी दी कि मनोज तंगहाली का शिकार नहीं था, बल्कि कारोबार चौपट होने की चिंता में डिप्रेशन का शिकार हो गया था। तीन-चार महीने पहले उसने दवा के थोक व्यापार का इरादा बनाया। इसके लिए प्रयास किए लेकिन बात नहीं बनी थी। आमदनी बंद होने और खर्च जारी रहने से उसकी चिंता बढ़ती जा रही थी। इस बीच उसने नींद की गोलियां खानी शुरू कर दी थीं।