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हत्या का केस दर्ज करने की धमकी देकर पुलिस ने मांगे थे दस हजार, लेकर लौटी युवक की लाश, हंगामा

Wed, 15 Nov 2017 09:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ पुलिस को उसके अपने ही लोग किस कदर कलंकित कर रहे हैं, लोडर चालक अजय निषाद (24) की खुदकुशी, इसकी एक और बानगी है। ठाकुरगंज की गऊघाट चौकी के पुलिसकर्मियों के खौफ से सहमे स्थानीय निवासी 24 वर्षीय लोडर चालक अजय निषाद ने मंगलवार की सुबह फांसी लगा ली। खबर फैलते ही इलाके में आक्रोश फैल गया। इलाकाई लोगों ने पुलिस चौकी घेर ली। एक घंटे तक बवाल चला। बाद में एसएसपी दीपक कुमार ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है।

अजय के पिता माता प्रसाद निषाद का आरोप है कि अजय चार साल से पड़ोस में रहने वाली राम दुलारी का लोडर चलाता था। सोमवार रात साढ़े दस बजे के करीब व लोडर लेकर गऊघाट पुलिस चौकी के सामने से होते हुए घर लौट रहा था। चौकी के सिपाही अरविंद और वीरेंद्र ने उसे रुकने का इशारा किया। अजय ने वसूली की आशंका से वाहन की गति तेज कर दी और भाग निकला।

हालांकि, दस कदम दूर ही लोडर बेकाबू होकर दीवार से टकरा गया। सिपाही उसके पास आए और पकड़कर धमकाने लगे। सिपाहियों ने अजय से कहा कि वह बंधे पर किसी व्यक्ति की हत्या करके भाग रहा है। यह सुनते ही अजय के होश उड़ गए। उसने हत्या से कोई लेना-देना न होने की बात कही। इस पर सिपाही बचने के लिए उससे 10000 रुपये मांगने लगे।
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अजय ने कहा कि रुपये नहीं हैं तो सिपाहियों ने उसका लोडर जब्त कर लिया और उसे जेल भेजने की धमकी दी। अजय वहां से पैदल ही घर पहुंचा और परिवारीजनों को मामले की जानकारी दी। घरवालों ने उसे काफी समझाया, लेकिन जेल जाने का भय उसके मन से नहीं निकल सका और उसने फांसी लगा ली।

चौकी हटाने व मुआवजे की मांग, जमकर हंगामा
गुस्साए लोगों ने करीब एक घंटे तक चौकी पर हंगामा व बवाल चला। एएसपी पश्चिम विकासचंद्र त्रिपाठी और सीओ चौक दुर्गा प्रसाद तिवारी सहित वजीरगंज, चौक, कैसरबाग, अमीनाबाद, तालकटोरा थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई। लोगों को समझाकर हटाने की कोशिश की गई लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा। इसमें एक युवक घायल हो गया। भीड़ ने चौकी इंचार्ज जेपी सिंह और वहां तैनात सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए 20 लाख रुपये मुआवजा मांगा।
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‘दस हजार दे दो, मामला रफा-दफा कर देंगे’
ठाकुरगंज की गऊघाट पुलिस चौकी के सिपाहियों ने चंद रुपयों की खातिर अजय को झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। अजय के पिता माता प्रसाद का कहना है कि अजय के पीछे पुलिस का मुखबिर सलीम और उसका बेटा पप्पू घर आ गए। सलीम ने मां प्रेमा से कहा कि अजय हत्या करके आया है। पुलिस पीछे पड़ी है, दस हजार रुपये देकर मामला रफा-दफा किया जा सकता है। चौकी से मामला थाने तक गया तो 50 हजार रुपये लगेंगे। पैसा नहीं दिया तो जेल भेज दिया जाएगा।

दहशत : रात भर घर नहीं आया, सुबह आया तो सब खत्म
माता प्रसाद ने बताया कि सलीम की बात सुनने के बाद अजय घबराकर भाग गया। रात भर घर नहीं आया। मंगलवार सुबह करीब पांच बजे पड़ोस के मकान की छत फांदकर घर पहुंचा और मां से कहा कि वह निर्दोष है। पुलिस उसे झूठे मामले में फंसा रही है। मां ने कहा कि वह डर के मारे कांप रहा था। मां और रामदुलारी दोनों ने उसे समझाया। प्रेमा ने कहा कि सुबह होने पर वह खुद थाना जाकर बात करेगी। तब तक के लिए उन्होंने अजय को मकान की पहली मंजिल पर स्थित कमरे में आराम करने को कहा। सुबह करीब आठ बजे प्रेमा बेटे के लिए चाय लेकर कमरे में पहुंची तो नजारा देखकर उनकी चीख निकल गई। अजय का शव फंदे से लटका हुआ था।

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गढ़ी कहानी : गर्दन फंसी तो बोली- बाइक को टक्कर मारकर भागा था
अपनी गर्दन फंसते देख गऊघाट चौकी के पुलिसकर्मियों ने अजय के बाइक सवार को टक्कर मारकर भागने की फर्जी कहानी गढ़ डाली। चौकी इंचार्ज जेपी सिंह का कहना था कि अजय अपने लोडर से किसी बाइक सवार को टक्कर मारकर भागा था। बाइक सवार ने चौकी आकर शिकायत की जिस पर सिपाहियों को उसके घर भेजा गया था। हालांकि, शिकायतकर्ता कौन था? पुलिस इस बारे में जानकारी नहीं दे सकी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि चौकी के सिपाहियों ने इस काम के लिए अपने मुखबिर सलीम को ही आगे किया है। सलीम ने पेशबंदी के तहत अजय पर लोडर से टक्कर मारकर भागने की तहरीर भी दी है। हालांकि, सलीम की तरफ से कोई तहरीर मिलने की बात से ठाकुरगंज पुलिस इनकार कर रही है। (इनसेट में अजय का फोटो)
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पब्लिक का आरोप : गुनाहों का अड्डा बन गई है गऊघाट चौकी
लोडर चालक की मौत से आक्रोशित इलाकाई लोगों का कहना था कि पुलिस चौकी गुनाहों का अड्डा बन गई है। यहां तैनात पुलिसकर्मी आम जनता को परेशान करते हैं और अपराधियों व मुखबिरों को शरण देते हैं। सुबह से शाम तक वाहनों से अवैध वसूली की जाती है। पुलिसकर्मी खुलेआम जुआ-सट्टा खिलवाते हैं। चौकी इंचार्ज की शह पर स्मैक-चरस और शराब बेची जाती है। अक्सर यहां लड़कियां स्कूटी से ड्रग्स खरीदते हुए नजर आ जाती हैं। शाम ढलते ही दरोगा-सिपाही जानवरों से भरे वाहन पास कराने में व्यस्त हो जाते हैं। पुलिसकर्मियों के इशारे पर यह काम मुखबिर सलीम करता है। लोगों का कहना था कि चौकी की स्थापना करीब डेढ़ साल पहले मंदिर की जमीन पर हुई थी। चौकी की आड़ में यहां तैनात पुलिसकर्मियों ने वसूली का खुला खेल शुरू कर दिया। लोगों ने यह भी बताया कि एक साल पहले मीना निषाद ने चौकी के लिए एयरकंडीशनर गिफ्ट किया था जिसे चौकी इंचार्ज अपने घर लेकर चले गए।
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चौकी हटाने व मुआवजे की मांग
करीब एक घंटे तक चौकी पर हंगामा व बवाल चला। एएसपी पश्चिम विकासचंद्र त्रिपाठी और सीओ चौक दुर्गा प्रसाद तिवारी सहित वजीरगंज, चौक, कैसरबाग, अमीनाबाद, तालकटोरा थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई। लोगों को समझाकर हटाने की कोशिश की गई लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा। इसमें एक युवक घायल हो गया। भीड़ ने चौकी इंचार्ज जेपी सिंह और वहां तैनात सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही।

रुपयों के चक्कर में रात को चार बार घर गए थे पुलिसकर्मी
अजय से वसूली के लिए पुलिसकर्मी सोमवार रात चार बार उसके घर भी गए थे। परिवारीजनों ने बताया कि अजय घर आया तो पीछे से सिपाही भी पहुंच गए। पुलिसकर्मी उसे व परिवारीजनों को धमकाकर लौट गए।
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सपा नेताओं को लाठियों से पीटा
लोडर चालक के फांसी लगाने की जानकारी मिलते ही समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. एबाद के नेतृत्व में सपा नेता व कायकर्ता भी गऊघाट चौकी पहुंच गए। सपा नेताओं ने पीड़ित परिवारीजनों से संपर्क कर उनके आरोपों का समर्थन किया। वह भी धरने पर बैठ गए और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हंगामा और घेराव पर पुलिसकर्मियों की सपा नेताओं से धक्का-मुक्की भी हुई। लाठीचार्ज में मो. एबाद को चोटें आई हैं।
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छिन गया सहारा : अजय की मौत ने पूरे परिवार को सदमे में कर दिया है। मां प्रेमा ने बताया कि अजय के अलावा उनके दो बेटे पवन, ओमकार और बेटी विजयलक्ष्मी, सुशीला व शीला हैं। विजयलक्ष्मी की शादी हो चुकी है। सुशीला की शादी तय हो गई है और तैयारियां चल रही हैं। शीला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। अजय घर का एकलौता कमाऊ सदस्य था। उसकी कमाई से ही गृहस्थी चल रही थी। कुछ दिन पहले अजय के लिए रिश्ता आया लेकिन उसने मना कर दिया। उसने मां से कहा था कि पहले बहन को डोली में बैठाकर विदा करूंगा, उसके बाद मैं घोड़ी चढूंगा। उसकी इस बात को याद करके प्रेमा फफक पड़ीं। परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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