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ठेकेदार ने विधानभवन के सामने लगाई खुद को आग, मचा हड़कंप, सीएम को पत्र भेजकर दी थी आत्मदाह की सूचना

Wed, 28 Aug 2019 02:37 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आत्मदाह का प्रयास करते वीरेंद्र को बचाते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम से भुगतान न होने से नाराज एक ठेकेदार ने मंगलवार को विधान भवन के सामने शरीर पर केरोसिन डालकर आत्मदाह की कोशिश की। पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन आग बुझाकर उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया।


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ठेकेदार ने खुद को लगाई आग - फोटो : amar ujala
आग से उसका पैर झुलस गया है। ठेकेदार का आरोप है कि निर्माण निगम के अधिकारी चालीस लाख रुपये के भुगतान के लिए उसे 14 वर्ष से दौड़ा रहे हैं।

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ठेकेदार को बचाते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
 सीतापुर के खैराबाद स्थित जोशी टोला निवासी वीरेंद्र कुमार रस्तोगी का आरोप है कि वर्ष 2005 से 2006 में उसने मेसर्स कुमार इंटरप्राइजेज फर्म पर राजकीय निर्माण निगम से मथुरा में शटरिंग का ठेका लिया था।

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आत्मदाह का प्रयास करते वीरेंद्र को बचाते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
विभाग पर उसका करीब 38 से 40 लाख रुपये बकाया है, लेकिन अधिकारी किसी भी तरह का बकाया न होने की बात कह रहे हैं।

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आत्मदाह का प्रयास करते वीरेंद्र को बचाते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
इसके लिए वह 14 वर्षों से अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से लेकर आला अधिकारियों से की, पर कोई सुनने वाला नहीं है। 
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पुलिसकर्मियों ने आग बुझाकर ठेकेदार को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया - फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर दी थी आत्मदाह की सूचना
वीरेंद्र ने 19 अगस्त को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री को आत्मदाह की सूचना दे दी थी। पत्र में उसने कहा था कि बकाया भुगतान व निर्माण सामग्री वापस कराने को लेकर 5 अगस्त को 15 दिन का दिया समय 20 अगस्त को पूरा हो रहा है। अब वह 27 अगस्त को विधान भवन के सामने दोपहर 12 बजे आत्मदाह करेगा। इसका पूरा दायित्व शासन व राजकीय निर्माण निगम का होगा। पत्र की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग, प्रबंध निदेशक राजकीय निर्माण निगम, पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी लखनऊ, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लखनऊ व सीतापुर को भेजी थी।
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वीरेंद्र को बचाते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
ठेकेदार दावे के नहीं दे पा रहे बिल
राजकीय निर्माण निगम के एमडी उत्तर कुमार गहलोत ने बताया कि करीब 13 वर्ष पुराने इस मामले में ठेकेदार कोई अपने दावे से संबंधित कोई भी बिल नहीं दे रहा है। ऐसे में इनका दावा स्वीकार नहीं हो पा रहा है।
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