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सीएए के विरोध के साथ वैवाहिक जीवन की शुरुआत, दूल्हे ने पहले किया प्रदर्शन फिर चढ़ा घोड़ी

Fri, 24 Jan 2020 11:46 AM IST
ishwar ashish न्यूज, डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर के उजरियांव स्थित गंज शहीदां कब्रिस्तान के पास तीसरे दिन विरोध जारी रहा। इस दौरान इलाके के एक युवक की बारात निकलनी थी। युवक ने फैसला किया कि वह पहले प्रदर्शन में शामिल होगा, फिर उसकी बरात जाएगी।

बरातियों समेत युवक प्रदर्शन में शामिल हुआ और नारेबाजी की। इस दौरान उसने कहा कि नागरिकता संसोधित कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट्रेशन (एनआरसी) से हमारी आने वाली जिंदगी प्रभावित हो सकती है। इसलिए वैवाहिक जीवन की शुरुआत भी विरोध के साथ की है।
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वहीं, ऐतिहासिक घंटाघर पार्क में सीएए व एनआरसी के विरोध के मंच पर कुरान की आयतों संग मंत्रों की गूंज भी सुनाई दी। यहां पिछले छह दिनों से प्रदर्शन कर रही मुस्लिम महिलाओं को समर्थन देने पहुंची हिंदू महिलाओं ने हवन कर एकता की मिसाल पेश की।

बुधवार को प्रदर्शनकारी 413 महिलाओं ने रोजा रखा तो दर्जन भर हिंदू महिलाओं ने भी संविधान की रक्षा के लिए उपवास किया। उधर, गोमतीनगर में महिलाओं का विरोध प्रदर्शन जारी है।
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घंटाघर पर बुधवार को पंडित राजवीर हवन कर मंत्र पढ़ रहे थे तो हवन में शामिल पूजा शुक्ला, सुनीता रावत, शिप्रा अवस्थी उनका साथ दे रहीं थीं। इसी बीच जेबा यास्मीन, तबस्सुम खान, राशिदा, सदफ जाफर और हुस्नआरा कुरान की आयतें पढ़ रही थीं।

इस दौरान घंटाघर पर तिरंगे लहराते रहे और देशभक्ति के गीत गूंजते रहे। शाम को सभी महिलाओं ने एक साथ रोजा इफ्तार व व्रत खोल कर संदेश दिया कि हमारी एकता अटूट है।

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सुभाषिनी अली भी पहुंचीं
घंटाघर पर महिलाओं के विरोध प्रदर्शन को समर्थन देने बुधवार को एडवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली भी पहुंचीं। उन्होंने कहा कि ये आंदोलन संविधान व देश बचाने के लिए है। एपवा की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी, सचिव कुसुम वर्मा, सह सचिव मीना ने भी महिलाओं को समर्थन दिया।

लविवि की पूर्व कुलपति एवं साझी दुनियां की अध्यक्ष डॉ. रूप रेखा वर्मा, मधु गर्ग, नाइश हसन, वंदना राय, प्रो. रमेश दीक्षित, श्रमयोगी भी समर्थन में घंटाघर पहुंचे। मैग्सेसे विजेता संदीप पांडेय दूसरे दिन भी चरखे से सूत कात कर गांधी के विचारों को महफूज रखने का संदेश दिया।
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गृहमंत्री के बयान बोलीं महिलाएं, हम भी अपने फैसले पर अडिग
राजधानी में मंगलवार को सीएए के समर्थन में जनसभा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने दो टूक कह दिया कि किसी कीमत पर अधिनियम वापस नहीं होगा। इसके बावजूद घंटाघर पर प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं का उत्साह नहीं डिगा। यही वजह रही कि बुधवार को भी भारी तादात में महिलाएं प्रदर्शन स्थल पर डटी रहीं। प्रदर्शन में शामिल जूही राज सिद्दीकी ने कहा कि महिलाओं का प्रदर्शन नारी शक्ति का प्रतीक है।
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उन्होंने कहा, गृहमंत्री कह रहे हैं कि कदम पीछे नहीं खींचेंगे। हम उनसे कहना चाहते हैं कि हम भी एक इंच पीछे हटने को तैयार नहीं है। जब तक सीएए कानून वापस नहीं होगा या उसमें संशोधन नहीं होगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वो एक महीने का समय लें या एक साल, हम उन्हें यहीं मिलेंगे। वहीं सदफ जाफर मुख्यमंत्री के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हम अपने हक की आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठा रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन लाइट, शौचालय बंद कर ज्यादती कर रहा है। शाजिया फुजैल ने कहा कि यह हमारे हक का सवाल है, हम आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
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प्रदर्शनकारी 72 महिलाएं बीमार
भीषण ठंड व कोहरे में खुले आसमान के नीचे छह दिन से प्रदर्शन कर रही महिलाएं बीमार हो रही हैं। उनकी मदद के लिए लगे चिकित्सा शिविर में बुधवार को 72 महिलाओं का परीक्षण कर दवाएं दी गईं। चिकित्सक ने बताया कि अधिकांश महिलाओं को सर्दी, खासी व बदन दर्द के साथ बुखार की शिकायत थी। बीते चार दिनों में करीब 500 महिलाओं का परीक्षण कर दवाएं दी गईं।

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स्थानीय युवक संभाल रहे यातायात
घंटाघर के सामने सड़क पर यातायात संभालने से पुलिस ने अपने हाथ खींचे तो स्थानीय युवकों ने यह जिम्मेदारी संभाल ली। वे शिफ्ट में यातायात बहाल रखने में योगदान दे रहे हैं।

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अधिवक्ता बोले, निशुल्क लड़ेंगे केस
अधिवक्ता मो. रिजवान, अरशद आलम, हबीब सिद्दीकी, विष्णु अग्रवाल, निशी शुक्ला, तस्नीम अहमद, मो. हमजा सहित सैकड़ों अधिवक्ताओं ने प्रदर्शकारी महिलाओं का उत्साह बढ़ाया। प्रदर्शनकारी महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर नाराजगी जताते हुए उनका केस निशुल्क लड़ने की बात कही।
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धरना स्थल पर भीड़ बढ़ने के कारण शांति बनाए रखने के लिए तैनात आरएएफ।
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