यू बनीं थी खजाना लूटने की योजना
शहीद स्मृति समारोह समिति के उदय खत्री ने बताया कि एक बार पं. राम प्रसाद बिस्मिल शाहजहांपुर से लखनऊ आने वाली गाड़ी संख्या 8 डाउन की थर्ड क्लास से यात्रा कर रहे थे। शाहजहांपुर में ट्रंक को लोड किया गया। इसमें भारतीयों पर जुल्म कर ब्रिटिश हुकूमत द्वारा लूटा गया माल था। वहीं से इसे लूटने की योजना बनी। 9 अगस्त, 1925 का वह दिन आया, जब पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र नाथ लहरी, चंद्रशेखर आजाद, केशव चक्रवर्ती, मुरारी लाल शर्मा, बनवारी लाल, मनमथ नाथ गुप्ता, सचीन्द्र नाथ बख्शी, मुकुंदी लाल ने काकोरी में खजाने की लूट को अंजाम दिया।
उन्होंने बताया कि शहीद चंद्रशेखर आजाद व मुरारी शर्मा ट्रेन की छत पर थे, जबकि बिस्मिल, मनमथ, सचीन्द्र नाथ, मुकुंदी लाल थर्ड क्लास कम्पार्टमेंट में थे। राजेंद्र नाथ लहरी व अन्य साथी सेकंड क्लास कम्पार्टमेंट में थे। वे रिवॉल्वर व माउजर लेकर चढ़े थे। शाम छह बजे के बाद जब ट्रेन काकोरी स्टेशन से आगे बढ़ी तो खजाने को लूट लिया गया। क्रांतिकारियों को उम्मीद से कम खजाना मिला। उन्हें करीब 4600 रुपये मिले, जो आज की तारीख में चालीस से पचास लाख रुपये के आसपास होंगे। उनके पास बैग नहीं थे तो गमछे में खजाने को भरकर ले गए।