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शासन की नई गाइडलाइन में 200 से 100 हुए बराती-घराती, टेंट व कैटरर्स को लगी 50 प्रतिशत तक की चपत

Tue, 24 Nov 2020 03:52 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सूर्यप्रताप और पंकज द्विवेदी व उनका परिवार - फोटो : अमर उजाला
शासन की ओर से जारी शादी समारोह की नई गाइडलाइन का कैटरर्स और टेंट कारोबारियों पर व्यापक असर पड़ा है। कारोबारियों का कहना कि समारोह में 100 लोगों की संख्या तय करने से करीब 50 फीसदी का नुकसान उठाना होगा। दरअसल, घराती और बराती की संख्या कम होने से शादी पंडाल का आकार भी छोटा और खाने वालों की तादाद भी कम हो गई। लखनऊ आदर्श टेंट एवं कैटरर्स व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार और महामंत्री रितिक जायसवाल ने बताया कि औसतन एक कैटरर्स को प्रति शादी एक लाख और टेंट कारोबारी को 50,000 का नुकसान होगा। कैटरर्स में किसी का 75,000 तो किसी का बजट सवा लाख रुपये तक कम होने का अनुमान है। विजय कुमार ने बताया कि 17 दिन की सहालग में अनुमानित 35,000 शादियां होनी है। जिनमें से करीब 20,000 शादियां तो खुले में होंगी। 



 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
ऐसे समझें घाटे का गणित
टेंट: पहले 200 के हिसाब से बनता शादी पंडाल, लेकिन अब 100 के हिसाब से बनेगा। यानी एक लाख की टेंट बुकिंग रह गई 50,000 रुपये की।
कैटरर्स: पहले 200 लोगों का खाना बनता, लेकिन अब 100 लोग ही खाना खाएंगे। 500 रुपये प्लेट के हिसाब से जोड़े तो एक लाख रुपये होते, जो अब 50 हजार रुपये ही रह जाएंगे।



 
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सूर्यप्रताप - फोटो : अमर उजाला
अब कितने मेहमानों का नाम हटाए 
सूर्यप्रताप की खुद की शादी है। कहते हैं कि दो-ढाई सौ लोग तो परिवार के ही हो जाते हैं। कोरोना गाइडलाइन को देखते हुए पहले ही ये संख्या 200 पर सीमित कर दी थी। अब इनमें से भी किससे कहें मत आना, समझ में नहीं आ रहा। ये सच है कि संक्रमण से बचना जरूरी है। इसके लिए हमने 200 लोगों के हिसाब से ही मास्क, सैनिटाइजर की व्यवस्था की थी।
 

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पंकज द्विवेदी व उनका परिवार - फोटो : अमर उजाला
हम समय से पहले ही पहुंच रहे लखनऊ
मूल रूप से अयोध्या निवासी पंकज द्विवेदी आजकल दिल्ली में रह रहे हैं। बहन की शादी लखनऊ से करनी है। सोमवार को उनका पूरा दिन वेडिंग प्लानर के  साथ फोन पर बात करते हुए बीता। बताते हैं कि वह तय समय से पांच दिन पहले ही लखनऊ पहुंच रहे, पर कहीं ऐसा न हो कि आने-जाने पर ही रोक लगा दी जाए। पंकज कहते हैं कि शादी से ठीक पहले ऐसा फैसला सुनकर भला कौन है, जो परेशान नहीं होगा।

 
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रवि यादव का परिवार - फोटो : अमर उजाला
मेहमानों को कैसे रोकें... सब असमंजस में
रवि यादव की शादी है। गीत-संगीत, मेहंदी की रस्म छोड़ परिवार इस कोशिश में जुटा है कि मेहमानों को आने से मना कैसे करें। रवि का कहना है कि लड़के की शादी में वैसे ही दिल खोलकर लोग बुलाते हैं।100 से अधिक संख्या तो हमारे परिजनों की ही है। 
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