आपस में चर्चा करते छात्र-छात्राएं।
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त्रेतायुग में जब दशरथ जी के पुत्र के रूप में राम का जन्म हुआ तो उस समय पूरी अयोध्या को ब्रह्मानंद की अनुभूति हुई थी, कुछ इसी तरह की अनुभूति संत समाज भी कर रहा है। जिनका नाम सुनने मात्र से ही सब शुभ हो जाता है, वह ब्रह्म स्वरूप भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। अयोध्या राममंदिर निर्माण के साथ ही सनातन संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है। राम की पैड़ी पर भूमि पूजन की खुशी में दिए जलाने की तैयारी में जुटी छात्र-छात्राएं भी उत्साहित नजर आईं।