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Yoga Tips: कलाइयों-उंगलियों में भी आर्थराइटिस का खतरा, ये योगासन कम कर सकते हैं इसका जोखिम

Sun, 04 Dec 2022 12:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाथों में आर्थराइटिस की समस्या - फोटो : Pixabay
आर्थराइटिस (गठिया) की समस्या तेजी से बढ़ रही है, 30 से कम आयु के लोगों में भी इसका जोखिम बढ़ता जा रहा है। यह बीमारी जीवन की गुणवत्ता और दैनिक कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर देती है। आमतौर पर माना जाता रहा है कि आर्थराइटिस की समस्या घुटनों में होती है जिसके कारण आपके लिए चलना, उठना तक भी कठिन हो जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि यह  कलाइयों-उंगलियों में हो सकती है? 

हाथों में आर्थराइटिस के जोखिम को कम करने के लिए दिनचर्या में योगासनों को शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। योगासन, मांसपेशियों की सख्ती को कम करने और हड्डियों के विकारों से बचाने में आपके लिए लाभकारी हो माने जाते हैं।

योग विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आप कलाई के दर्द से पीड़ित हैं और हाथों में आर्थराटिस की आशंका है तो योग करना बेहतर विकल्प हो सकता है। ऐसे कई योगासन हैं जो आपकी कलाई की मांसपेशियों को मजबूत करने और कलाई की गतिशीलता में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। कलाई में दर्द की समस्या काफी आम है, दुर्घटना या कंप्यूटर पर लगातार टाइप करने के कारण इसकी दिक्कत हो सकती है। आइए जानते हैं कि इसके लिए किन योगासनों को दिनचर्या का हिस्सा बनाना आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है? 
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गोमुखासन योग से लाभ - फोटो : istock
गोमुखासन योग से होने वाले फायदे

गोमुखासन को शरीर के लिए कई प्रकार से लाभकारी अभ्यासों में से एक माना जाता है, शरीर की स्ट्रेचिंग के साथ मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं में भी इस योग के लाभ पाए गए हैं। हाथों को पीछे की तरफ ले जाने वाले इस अभ्यास से कलाइयों की ताकत बढ़ती है और संबंधित मांसपेशियों की जकड़न कम होती है। गतिशीलता में सुधार करने से लेकर छाती को खोलने के अलावा कंधों की समस्याओं को कम करने में भी इस अभ्यास के लाभ देखे गए हैं। 
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गरुणासन से होने वाले फायदे - फोटो : Istock
ईगल पोज से कलाइयों को मिलता है आराम

ईगल पोज अभ्यास की आदत बनाना शरीर के लचीलेपन और ताकत को बढ़ाकर, कलाई की गतिशीलता में सुधार करने का प्रभावी तरीका हो सकता है। एकाग्रता को बढ़ावा देने के लिए भी इस योग का अभ्यास करना फायदेमंद हो सकता है। यह पोज़ शरीर को स्ट्रेच करके बॉडी पोस्चर को भी बढ़ावा देता है। नियमित रूप से इस अभ्यास की आदत बनाना हाथों में आर्थराइटिस के जोखिम को कम करने में आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। 
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प्लैंक पोज का अभ्यास करें - फोटो : istock
प्लैंक पोज की बनाएं आदत

प्लैंक पोज का अभ्यास आपकी रीढ़, पीठ और आपके पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने में आपके लिए विशेष लाभकारी है। यह आर्थराइटिस के जोखिमों को कम करने वाला सबसे प्रभावी अभ्यास हो सकता है। प्लैंक पोज का अभ्यास शरीर की ताकत को बढ़ाने और हड्डियों को स्वस्थ रखने में आपके लिए विशेष लाभकारी हो सकता है। प्लैंक पोज के अभ्यास की आदत कोर से लेकर घुटनों तक के लिए विशेष लाभकारी हो सकती है। 



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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